कलयूगी बेटे-बेटी समेत, तीन ACP, एक SHO, और डॉक्टर के खिलाफ कोर्ट ने दिए मामला दर्ज करने के आदेश

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गुरुग्राम पुलिस के तीन ACP औऱ एक SHO के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है। यही नहीं कोर्ट के मार्फत ये केस सेक्टर-56 में दर्ज किया गया जिसमें शिकायतकर्ता के बेटे-बेटी और बहु के अलावा एक डॉक्टर और कुल 14 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

असल में सुमन विर्क नाम की महिला गुरुग्राम के सेक्टर-56 में किराये के मकान पर रहती है। वह कभी अपने बेटे और बहु के साथ रहती थी। सुमन का पति से डिवोर्स होने के बाद 75 लाख रुपए मिले थे जिसके बाद बेटे ने अपने पास मां को रख लिया। लेकिन ये किसे पता था जो बेटा उसे प्यार दिखा रहा है वो प्यार नहीं बल्कि सुमन विर्क के लिए जीते जी मौत बनने वाला है।

दरअसल 2011 में सुमन विर्क का अपने पति के साथ डिवोर्स हुआ औऱ उसके बाद उसके बेटे परविंद्र विर्क ने अपने साथ मां को रख लिया और उसके बाद मां के पास जो 75 लाख रुपए जमा थे वो भी फ्लैट लेने के नाम पर ले लिए और उसके बाद फ्लैट भी मां की नहीं बल्कि अपनी पत्नी के नाम करा लिया।

सुमन विर्क ने जब इसका विरोध किया तो 20 अक्टूबर 2012 को उसे कुछ नशीला पदार्थ खिला दिया जिसके बाद सुमन को बिमारी का हवाला दे दिल्ली के अंधेरिया मोड़ स्थित तुलसी होम में भर्ती करा दिया। वहां भी सुमन को पागल करार देकर भर्ती किया गया। किसी तरह 110 दिनों के बाद सुमन इस अस्पताल की दूसरी ब्रांच मांडी गांव दिल्ली से निकल आई और इस पूरे मामले की जानकारी गुरुग्राम पुलिस को दी। जिसके बाद पुलिस ने इस मामले की जांच की औऱ जांच आईओ बाबूलाल को सौंपी गई।

बाबू लाल ने इस पूरे मामले में जांच की और पाया किय सुमन विर्क जो 65 साल की महिला है उसके  साथ जो हुआ वो आपराधिक दायरे में आता है। लेकिन इसके बाद बेटे ने पुलिस में शिकायत होने के बाद सैटलमेंट करने पर अपनी मां सुमन विर्क को 24 लाख रुपए वापस कर दिये। लेकिन ये मामला यही खत्म नहीं हुआ इसके बाद सुमन की बेटी ने वो 24 लाख रुपए अपनी मां को अपने पास बुलाकर ले लिये जिसके बाद पता चला कि इस पूरे षडयंत्र में उसकी बेटी भी शामिल थी।

एक बार फिर शिकायत दी गई। जो जांच रिपोर्ट बाबू लाल आईओ सेक्टर-56 ने तैयार की थी उस रिपोर्ट को बदलवाने के लिए डॉक्टर गौरव गुप्ता जिसके अस्पताल में सुमन को रखा गया थाउसने दबाव बनाया औऱ पीडिता की शिकायत के अनुसार उसी से मिलकर गुरुग्राम पुलिस के 3 एसीपी और एक एसएचओ ने सुमन विर्क के मामले को आपराधिक श्रेणी से हटा कर उसे सामान्य घरेलू श्रेणी का घोषित कर दिया।

जब न्याय नहीं मिला तो सुमन विर्क ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट में जो दस्तावेज जमा हुए उसमें साफ हुआ कि सुमन विर्क मामले में जांच रिपोर्ट और दस्तावेजों के साथ छेड़छाड की गई है। जिसके बाद कोर्ट ने 3 एसीपी एक एसएचओ औऱ सुमन के बेटे बेटी समेत डॉक्टर गौरव गुप्ता के साथ 14 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करने के आदेश दिये।

 

 

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