जाति आधारित आरक्षण रहेगा, सरकार चाहे तो आरक्षण 75% करके 50% समाजिक, 25% आर्थिक कर सकते है

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रिपब्लिकन पार्टी के अध्यक्ष और केंद्रीय सामाजिक न्याय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने यह बयान दिया है कि जब तक इस देश में जाति है, तब तक जाति आधारित आरक्षण रहेगा। किसी को भी दलित, आदिवासी और ओबीसी समाज को मिले आरक्षण को ठेस पहुंचाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। जाति आधारित आरक्षण पर बात करने से पहले लोगों को जाति व्यवस्था खत्म करनी चाहिए। अगर कोई आरक्षण आर्थिक आधार पर बनाने की कोशिश करेगा, तो इसे सफल नहीं होने दिया जाएगा।

मनसे प्रमुख राज ठाकरे द्वारा लिए गए इंटरव्यू में राकांपा अध्यक्ष शरद पवार ने आने वाले समय में जाति के बजाय आर्थिक आधार पर आरक्षण होने की बात कही थी। अब इसको लेकर राजनीति शुरु हो गई है। आठवले ने आर्थिक आधार पर आरक्षण दिए जाने का कड़ा विरोध किया है।
आठवले ने कहा कि शरद पवार वरिष्ठ नेता हैं, कई बार वे मुद्दों पर दलित आदिवासियों का साथ दे चुके हैं। वे आधुनिक समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष विचारों वाले नेता हैं। आठवले ने कहा आरक्षण संविधान निर्माता डॉ. बाबसाहेब भीमराव आंबेडकर द्वारा दलित, आदिवासियों को दिया गया कवच कुंडल है। इसीलिए जाति आधारित आरक्षण को हम कभी खत्म नहीं होने देंगे।

अठावले ने आरक्षण की तरकीब निकालते हुए कहा है कि आरक्षण की सीमा बढ़ाकर 75 फीसदी कर दी जानी चाहिए, जिसमें 50 फीसदी आरक्षण सामाजिक तो 25 फीसदी आरक्षण आर्थिक आधार पर दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि दलित, आदिवासी और ओबीसी समाज का आरक्षण बरकरार रखते हुए मराठा, ब्राह्मण, लिंगायत जैसे सवर्ण समाज के गरीब लोगों को आरक्षण दिया जा सकता है।

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