कैथल में नटवरलालों ने मुख्यमंत्री राहत कोष को लगाया लाखों का चूना, फर्जी दस्तावेजों के सहारे ऐंठे रुपये

Breaking Uncategorized चर्चा में बड़ी ख़बरें सरकार-प्रशासन हरियाणा हरियाणा विशेष

Yuva Haryana
Kaithal, 01 Sept, 2018

भारत के लोग देश प्रेम में अक्सर प्रधानमंत्री राहत कोष और मुख्यमंत्री राहत कोष में अपने खून पसीने की कमाई को दान में देते हैं ताकि उन लोगों का भला हो सके जिनके पर किसी तरह की आपदा या बीमारी आने पर धन की कमी हो तो सरकार से सहायता ली जा सके लेकिन इसके विपरीत कुछ नटवरलाल ऐसे भी है जो इस तरह के मानव कल्याण कोष में फर्जीवाड़ा करने से बाज नहीं आते।

इसका ताजा उदाहरण कैथल में सामने आया है जिसमें करीब दो दर्जन लोग गरीबी का मुखोटा पहनकर लाखों रुपए की चपत मुख्यमंत्री  राहत कोष में लगा चुके हैं और इन लोगों ने सरकारी व गैर सरकारी अस्पतालों से बीमारी के फर्जी प्रमाण पत्र बनाकर सुनियोजित ढंग से यह फंडा रचा गया है। इस फर्जीवाड़े में कौन-कौन लोग और शामिल हैं यह तो पुलिस की जांच के बाद ही पता लगेगा परंतु ऐसे फर्जीवाड़ा से उन लोगों को जरूर ठेस पहुंची होगी जिन्होंने अपनी मेहनत की कमाई में से यह चंदा दिया होगा ।

 कैंसर, हृदय रोग व गुर्दे के रोगों के नाम पर फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर सरकार से लाखों रुपये की आर्थिक सहायता लेने का मामला सामने आया है। मामले में किसी बड़े गिरोह की आशंका जताई जा रही है जो सरकारी पैसे का ले रहे हैं। सिविल सर्जन डॉ.सुरेंद्र नैन की शिकायत पर सिविल लाइन थाने में 24 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। महिलाओं के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है। मामले में बड़े गिरोह के सक्रिय होने का अंदेशा हुआ तो पुलिस को शिकायत दी गई।

पुलिस ने प्रेम चंद निवासी मूंदड़ी, रोहित कुमार निवासी खेड़ी गुलामअली, सीता देवी निवासी मूंदड़ी, विद्या देवी निवासी चीका, दिव्या निवासी पट्टी आफगान, दीपा निवासी पट्टी अफगान, हरिश निवासी नानकपुरी कॉलोनी, शांति निवासी किच्छाना, संतरो निवासी टीक, मोमन निवासी मूंदड़ी, संतरो निवासी मूंदड़ी, पानो निवासी अजीतगढ़, राममेहर निवासी चीका, बीरो बाई, खजानी देवी निवासी प्यौदा, बिमला निवासी नानकपुरी कॉलोनी, मिल्खा सिंह निवासी कांगथली, उदय सिंह निवासी पोलड़, राजो देवी निवासी चीका, गीता देवी निवासी नानकपुरी कॉलोनी, चंद्रभान निवासी पोलड़ मंडी, मूर्ति देवी निवासी नानकपुरी कॉलोनी, संतोष निवासी मूंदड़ी, सुरेश कुमार निवासी धर्मपुरा के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई गई है। एसपी आस्था मोदी ने इसकी पुष्टि की है।  

 
 

स्वास्थ्य विभाग की सतर्कता के चलते सामने आया

फर्जी प्रमाण पत्रों से मुख्यमंत्री राहत कोष  से  लाखों रुपए लेने के मामले को सिविल सर्जन कार्यालय में कार्यरत डॉक्टर संदीप जैन ने उजागर किया है. डॉक्टर संदीप जैन चिकित्सा अधिकारी के पद पर सिविल हस्पताल में काम कर रहे हैं करीब 7 महीने पहले उन्हें डीसी कार्यालय की ओर से आने वाले आवेदन को लेकर नोडल अधिकारी लगाया गया था. जब उनके पास कुछ प्रमाणपत्र आये तो देखा गया की कुछ प्रमाण पत्रों में बीमारी का नाम गलत लिखा था जैसे एक्यूट मायलाइड, ल्यूकीमिया की जगह ब्लड कैंसर लिखा हुआ था इसी तरह मायोकार्डियल इन्फेक्शन की जगह हार्ट अटैक लिखा हुआ था जो भाषा लिखी हुई थी उसे डॉक्टर इस्तेमाल नहीं करते है।  

 
यह है प्रक्रिया
कैंसर, हृदय रोग व गुर्दे के रोगों बीमारियों के इलाज के लिए आर्थिक रूप से कमजोर लोगो को  मुख्यमंत्री राहत कोष से आर्थिक सहायता दी जाती है। जरूरतमंद मरीज को इसके लिए डीसी कार्यालय में आवेदन करना होता है। डीसी के आदेश पर इसके लिए सिविल सर्जन से बीमारी की स्थिति एवं तहसीलदार से आवेदक की आर्थिक स्थिति की पुष्टि की जाती है। इसके बाद ही मुख्यमंत्री सैल में रिपोर्ट भेजी जाती है।
है। आवेदक जिस अस्पताल भी  से इलाज करवा रहा होता है उस अस्पताल की ओर से खर्चे का अनुमान का प्रमाण पत्र भी साथ लगाया जाता है। और पूरी जाँच प्रक्रिया के बाद यह सहायता राशि दी जाती है
 
शक कैसे हुआ
मुख्यमंत्री राहत कोष के तहत गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर ह्रदय रोग वह गुर्दे के रोगों के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है डॉक्टर संदीप ने बताया कि 6 महीने पहले उनके पास डीसी कार्यालय से प्रमाण पत्र आए उनमें 4 से 5 लाख रूपये  की आर्थिक सहायता का   क्लेम किया गया था क्लेम की राशि ज्यादा होने पर उन्हें शक हुआ कुछ दिन के बाद फिर 4 से 5 लाख रूपये  की सहायता के लिए क्लेम आया तो उन्होंने ज्यादा राशि क्लेम करने वाले पत्रों की जांच करने की सोची सबसे पहले जिस हस्पताल से प्रमाण पत्र जारी किए गए थे उन्हें पत्र लिखा गया और पूछा गया क्या आप के हस्पताल से यह प्रमाण पत्र जारी किया गया है तो जवाब नहीं मैं आया कि उक्त हस्पताल में ऐसा कोई प्रमाण पत्र जारी नहीं किया है तू डॉक्टर संदीप ने इसमें मामले की गहराई में जाना चाहा और उन्होंने 2 साल पहले के सभी प्रमाण पत्रों को खंगालना शुरू किया तो उसमें से 31 प्रमाण पत्रों पर उन्हें शक हुआ । जिन प्रमाणपत्रों के फर्जी होने की आशंका थी  सभी में एक जैसी  लिखाई लिखी गई थी  प्रमाण पत्र का स्टाइल भी एक जैसा ही था  लेकिन अस्पतालों के नाम अलग-अलग थे  प्रमाण पत्र पर डॉक्टरों के हस्ताक्षर भी फर्जी थे जिसके बारे में जिन्ह अस्पतालों ने यह प्रमाण पत्र जारी किए थे उनसे ईमेल और पत्रकार के द्वारा जानकारी मांगी गई तो जानकारी ने 24 प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए और अभी 7 हस्पतालो की   तरफ से जवाब आना बाकी है तो  मामले की जानकारी सिविल सर्जन व  कैथल की उपायुक्त को दी गई मामला गंभीर होने के कारण पुलिस में  24 लोगों के खिलाफ केस दर्ज करवाया गया.
 

SP कैथल आस्था मोदी ने बताया यह घपला स्वास्थ्य विभाग की सतर्कता के चलते सामने आया है जिसमे कैंसर की बीमारी के लिए आर्थिक सहायता के लिए आवेदन करने वाले मरीजों को कोई बीमारी  नहीं है  और और एक जैसी हैण्ड राइटिंग से  नकली बिल बनवाकर  सरकार की  बनाई गई  नीतियों का  गैरकानूनी  ढंग से  फायदा उठाकर सरकारी राहत कोष को नुकशान पहुचाया है जिसके चलते कैथल जिले के 24 लोगों के खिलाफ IPC की धारा 120 बी 420 467  और 468 के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *