बेटी की गुमशुदगी का विवाद बढाएगा सीएम की टेंशन, महापंचायत ने किया है ये ऐलान

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Yuva Haryana
Rewari, 10 Oct, 2018

रेवाड़ी के मोहनपुर गांव से दलित परिवार की लापता बेटी का मामला तूल पकड़ रहा है तो वहीं मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का विरोध भी यहां पर हो सकता है। महापंचायत ने बेटी को ढूंढने में लापरवाही को लेकर पुलिस से बात तक नहीं की। हाल ही में बावल बाजार को पूर्ण रूप से बंद रखा गया और मुख्यमंत्री के 16 अक्टूबर की रैली के बहिष्कार का ऐलान कर दिया।

दरअसल रेवाड़ी के मोहनपुर गांव से 27 जून 2018 को एक दलित परिवार की 12 वर्षीय बेटी गायब हो गई थी. बेटी के गायब होने की शिकायत पुलिस को भी दी गई। परिजनों ने पड़ोसियों के घर अक्सर जाने की बात बताई, पुलिस ने मामूली पूछताछ की और बाद में केस को ठंडे बस्ते में डाल दिया।

करीब तीन महीने से ज्यादा का समय बीतने के बाद भी बेटी का सुराग नहीं लगा तो आम लोग सड़कों पर उतर आए। बावल में चार अक्टूबर को कई गांवों की महापंचायत हुई ताकि स्थानीय मंत्री बनवारी लाल इस मामले में कुछ अधिकारियों की खिंचाई करे और बेटी की बरामदगी हो सके लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो पाया।

चार अक्टूबर को हुई महापंचायत में जब डीएसपी बात करने के लिए पहुंचे तो महापंचायत में पहुंचे लोग पुलिस की कार्यशैली से भड़क गए। सभी ने पुलिस को खूब खरी खोटी सुनाई और वहां से जाने के लिए बोल दिया।

बेटी के लापता होने का मामला अब गुरुग्राम क्राइम ब्रांच को दे दिया गया है ताकि बच्ची की बरामदगी हो सके, लेकिन अभी तक बच्ची का कोई सुराग नहीं लग पाया है।

क्या है पूरा मामला ?

रेवाड़ी के गांव मोहनपुर का निवासी दिहाड़ी मजदूरी का काम करते हैं. उनके बड़े भाई गांव में ही एक छोटी सी दुकान चलाते हैं. 27 जून की यह घटना है जब शाम को करीब चार बजे उनकी 12 साल की बेटी शिवानी घर से गायब हो गई। शिवानी हाल ही में नौवीं कक्षा में हुई थी। इस केस में पुलिस के पास 28 जून को शिकायत दी गई थी. बावल थाने में इसकी एफआईएआर दर्ज की गई थी. पुलिस ने शक के आधार पर पड़ोसियों से पूछताछ भी की थी लेकिन जांच आगे नहीं बढ़ पाई. जिसके बाद से पुलिस इस मामले में कुछ भी नहीं कर पाई है। अब पुलिस ने इस केस को गुरुग्राम क्राइम ब्रांच को सौंपा गया है। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने इस केस में सही से जांच नहीं कर रही है।

स्थानीय लोगों में क्यों है नाराजगी ?

बच्ची की बरामदगी को लेकर चार अक्टूबर को बावल के 84 गांवों की महापंचायत हुई थी जिसमें करीब छह घंटे तक बातचीत की गई। इस महापंचायत में डीएसपी लोगों की बात सुनने के लिए आए थे. लेकिन स्थानीय लोगों ने डीएसपी की बात सुनने से इंकार कर दिया और खरी खोटी सुनाकर भेज दिया था।

महापंचायत में स्थानीय विधायक डॉ. बनवारी लाल के पहुंचने की उम्मीद लोगों को थी, लेकिन बनवारी लाल वहां पर नहीं पहुंचे जिसके बाद लोगों का गुस्सा ज्यादा बढ़ गया। बताते हैं कि इससे पहले करीब एक महीने से चल रहे धरने को उद्योग मंत्री विपुल गोयल ने आश्वासन देकर समाप्त करवाया था। उस वक्त मंत्री विपुल गोयल ने कहा था कि बच्ची सुरक्षित है, लेकिन ये किस बेस पर कहां गया इसका अभी तक कोई अंदाजा नहीं है।

बच्ची की बरामदगी को लेकर आज फिर बावल के बाजार को बंद रखा गया है और इस मामले में महापंचायत ने 51 सदस्यों की एक कमेटी बनाई है। अब महापंचायत ने 16 अक्टूबर को बावल में होने वाली मुख्यमंत्री की रैली के बहिष्कार का ऐलान कर दिया है।

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