जींद के अलेवा में दो गांवो ने भाईचारे की दी मिसाल, 300 साल से बंद दो गांवो का हुक्का-पानी खोला

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Yuva Haryana

Jind (31 March 2018)

चूहड़पुर और खरक भूरा गांव के सर्वजातीय लोगों की पंचायत के बीच को एक अहम फैसला हुआ है। दोनों गांव के बीच पिछले 300 साल से हुक्का-पानी की पाबंदी थी, जो अब खुल गई है। जिसके बाद गांव के दादा खेड़े पर हवन कराया गया।

इस मामले को लेकर चूहड़पुर गांव की चौपाल में शुक्रवार को तीन गांवों के बड़े लोगों की पंचायत हुई। पंचायत में फैसला किया गया कि पिछले 300 साल की हुक्का पानी की पाबंदी को खत्म कर के गांवों के लोगों के बीच हुए मतभेद को भूलकर एक नया रिश्ता बनाना है।

बता दें कि चूहड़पुर के बुजुर्गो ने बताया कि लगभग 300 साल पहले गांव के बुजुर्ग भूरिया राम खरक भूरा गांव किसी काम से गया था। इस दौरान वहां के लोगों ने बुजुर्ग पर चोरी का आरोप लगा दिया था।

बुजुर्ग ने चोरी के आरोप को नकारते हुए गांव के लोगों की इसके लिए कोई भी शर्त पूरी करने की बात कही थी। इसको लेकर बुजुर्ग ने पीपल का पता हाथ पर रखकर उस पर आग में तपा कर लोहे का गोला रखकर चोरी न करने का विश्वास दिलाया था।

लोहे के गोले से भी बुजुर्ग का हाथ नहीं जला था। इससे वह निर्दोष साबित हुआ। उसी समय से चूहड़पुर गांव के लोगों ने खरक भूरा गांव के लोगों से संबंध तोड़कर आपस में हुक्का पानी बंद कर दिया था।

वहीं दोनों गांवों के लोगों ने गांव के कुंडी तालाब पर एक पीपल का पौधा लगाया। ताकि पीपल के पत्ते से खरकभूरा के लोग माफी मांग सके। इसके बाद दोनों गांवों की पाबंदी खुलने के बाद चूहड़पुर गांव के लोगों ने एक सामूहिक भोज दिया। फैसले के बाद चूहड़पुर गांव के लोग खरक भूरा के लोगों के न्योते पर रविवार को गांव जाकर भोजन करने जाएंगे।

 

 

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