प्लॉट का एन्हासमेंट का बकाया भरने का एक और मौका देगी सरकार, सीएम ने दी जानकारी

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Sahab Ram, Yuva Haryana
Chandigarh, 08 Oct, 2018
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने आज हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के अलाटियों के लिए राहत भरी खबर दी है। उन्होंने कहा कि रिबेट देकर अलाटियों को अपने प्लॉट का एन्हासमेंट का बकाया भरने के लिए एक मौका और दिया जाएगा। 
मुख्यमंत्री आज गुरुग्राम में सूचना, जन संपर्क एवं भाषा विभाग हरियाणा द्वारा तैयार की गई विकास गीत सीडी के लांच अवसर पर मीडिया प्रतिनिधियों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने स्वयं एचएसवीपी अलाटियों के एन्हासमेंट का मुद्दा छेड़ा और कहा कि वे इसे हल करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों एन्हासमेंट सैटलमेंट के लिए दी गई 40 प्रतिशत रिबेट का फायदा काफी संख्या में अलाटियों ने उठाया और एन्हासमेंट के लगभग 1400 करोड़ रुपये के एवज में 850 करोड़ रुपये जमा भी हुए। 
उन्होंने कहा कि एचएसवीपी सैक्टरों की विभिन्न रैजीडेंट एसोसिएशनों को बुलाकर उन्होंने एन्हासमेंट के बारे में बातचीत की थी। इस दौरान उन्होंने जो मांगे उठाई थी उनमें से ज्यादात्तर पूरी कर दी गई हैं और केवल दो मांगे रहती हैं, जिनके समाधान के लिए तीन रिटायर्ड जजो की एक कमेटी बनाई गई है।
उन्होंने कहा कि उस कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद उनकी इन मांगों का भी समाधान हो जाएगा। साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि एचएसवीपी के जो अलाटी पिछली रिबेट योजना का लाभ नहीं उठा पाए, उनके लिए फिर से एक बार  रिबेट योजना लाई जाएगी परंतु इस बार उन्हें 40 प्रतिशत से कम की रिबेट मिलेगी ताकि पिछली रिबेट का फायदा लेने वाले उन अलाटियों को ये ना लगे कि उन्होंने दो महीने पहले एन्हासमेंट की राशि भर कर गलती की है। 
एन्हासमेंट देर से भेजने के लिए पिछली कांगे्रस सरकार को दोषी ठहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 1994 की भी एन्हासमेंट अलाटियों को नहीं बताई गई क्योंकि उस सरकार के नेता सोचते थे कि जब किसानों को उनकी जमीन का पैसा देना होगा, तब एन्हासमेंट की राशि के बारे में अलाटियों को बता देंगे। ऐसा करने से कोर्टो में लिटिगेशन बढ़ता है क्योंकि काफी संख्या में अलाटियों ने अपने प्लॉट आगे बेच भी दिए होंगे।
मनोहर लाल ने कहा कि उनका मानना है कि अलाटी को शुरू में ही उसकी पूरी लायब्लिटी के बारे में बताया दिया जाए। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने इतने गड्ढे खोदे हुए थे कि भरते-भरते चार साल हो गए हैं। ऐसा लगता है कि पिछली सरकार में किसी ने दिमाग लगाया ही नहीं, अफसरों ने लगाया होगा लेकिन वे अपने हिसाब से सोचते हैं। उन्होंने कहा कि हम सभी के विचार सुनते हैं और जनहित को सर्वोपरि रखते हुए फैसला लेते हैं क्योंकि जनहित हमारी प्राथमिकता है। 

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