Home Breaking सीएम खट्टर ने ‘मुख्यमंत्री किसान खेत सड़क मार्ग’ योजना की घोषणा की, आने वाले 5 सालों में हर गांव के रास्ता को बनाया जाएगा खड़ंजे का

सीएम खट्टर ने ‘मुख्यमंत्री किसान खेत सड़क मार्ग’ योजना की घोषणा की, आने वाले 5 सालों में हर गांव के रास्ता को बनाया जाएगा खड़ंजे का

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Yuva Haryana

Chandigarh, 11 Dec, 2018

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने आज ‘मुख्यमंत्री किसान खेत सड़क मार्ग’ योजना के नाम से एक नई योजना की घोषणा की है, जिसके तहत प्रदेश के गांवों में 3 और 4 करम के सभी रास्तों को आने वाले पांच सालों में चरणबद्ध ढंग से खड़ंजे का बनाया जाएगा। इस योजना के तहत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र से 500 किलोमीटर रास्तों को पक्का किया जाएगा।

मुख्यमंत्री कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा आयोजित किसानों, वैज्ञानिकों और सरकारी अधिकारियों के ‘टॉप 100 एग्रीकल्चर मीट’ के समापन सत्र में बोल रहे थे। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ओपी धनखड़ और हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड की चेयरपर्सन कृष्णा गहलावत भी इस अवसर पर उपस्थित थी।

मनोहर लाल ने कहा कि यह भी निर्णय लिया गया है कि अब प्रदेश में किसान अपनी कृषि योग्य भूमि का पंजीकरण वर्ष में दो बार करवा सकेंगे। उन्होंने कहा कि किसान अपनी बोई गई फसल का नाम और क्षेत्र जैसे विवरण ग्राम स्तर पर स्थापित सांझा सेवा केन्द्रों में दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से विभिन्न मानकों पर किसानों की मदद हो सकेगी, जिसमें खरीद, मुआवजा, बीमा और बैंक ऋण इत्यादि शामिल हैं।

किसानों द्वारा भूमि का पंजीकरण करवाने के बाद कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा उसकी जांच की जाएगी और गांव के पटवारी द्वारा इसे सत्यापित किया जाएगा।  किसानों की भूमि का पंजीकरण दोनों मामलों, चाहे उस भूमि पर फसल की बुआई हुई हो या वह खाली पड़ी हो, में हो सकेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के प्रयास किये जा रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा यह सुनिश्चित करने के लिए लक्ष्य निर्धारित किया गया है कि किसानों को फसल विविधिकरण तथा वैज्ञानिक और आधुनिक प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से प्रति एकड़ कम से कम एक लाख रुपये की आय हो।

इसके लिए, उन्होंने प्रगतिशील किसानों और किसान नेताओं को आगे आने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए काम करने का आह्वन किया। उन्होंने किसानों के वित्तीय प्रबन्धन हेतु भी एक तंत्र विकसित करने पर बल दिया ताकि वे अपनी उत्पादकता बढ़ाने के लिए धनराशि का उपयुक्त इस्तेमाल कर सकें। कृषि को एक व्यवसाय की संज्ञा देते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्यक्ष विपणन की प्रणाली विकसित की जा रही है ताकि किसानों के खर्चे को कम किया जा सके और उनकी आय बढ़ाई जा सके।

किसानों को परम्परागत खेती की बजाय सब्जी, फल-फूल और औषधीय पौधों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार दूध, फल-फूल और अण्डों जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के माध्यम से  दिल्ली और उसके आसपास के गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा जैसे क्षेत्रों की लगभग चार करोड़ जनसंख्या की जरूरतों को पूरा करने व किसानों की आय बढ़ाने के लिए पैरी-अर्बन खेती की परिकल्पना पर भी विशेष बल दे रही है।

पानी बचाने के लिए राज्य के किसानों को ‘फ्लड इरीगेशन’ न करने और सूक्ष्म सिंचाई को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे न केवल सिंचाई की लागत कम होगी बल्कि पानी की कम उपलब्धता वाले क्षेत्रों में पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा।

इसके अलावा, बिजली बचाने के लिए सौर ऊर्जा पंपों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी तरह, जल भंडारण और जल रिचार्जिंग पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है ताकि आवश्यकतानुसार सूक्ष्म सिंचाई के माध्यम से पानी का उपयोग किया जा सके।

 

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