एससी, एसटी के मामलों का जल्द होगा निपटारा, सीएम खट्टर ने दिये आदेश

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Sahab Ram, Yuva Haryana
Chandigarh, 04 Dec, 2018

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति  (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम के तहत दर्ज मामलों के निपटान के लिए विशेष तौर पर लगाई जाने वाली अदालतों (एक्सक्लूसिव कोर्ट) की स्थापना के लिए प्राथमिकता के आधार पर कार्य करने के निर्देश दिए आरंभ में ऐसे न्यायालय उन चार जिलों में स्थापित किये जाएंगे जहां लम्बित मामलों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है।

मनोहर लाल आज यहां अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार रोकथाम) नियम, 1995 के प्रावधान के तहत हुई प्रगति की समीक्षा करने के लिए राज्य स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। आवास एवं जेल मंत्री कृष्ण लाल पंवार और अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्य मंत्री कृष्ण कुमार बेदी भी बैठक में उपस्थित थे।

बैठक में बताया गया कि उच्च न्यायालय द्वारा पहले ही अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के विरूद्घ अत्याचार के मामलों के निपटान के लिए राज्य के प्रत्येक जिले में अतिरिक्त जिला न्यायाधीश-1 की अदालत को विशेष अदालत के रूप में अधिसूचित कर दिया गया है। हालांकि, विशेष अदालतों की स्थापना का मामला विचाराधीन है। अधिनियम के तहत अदालतों द्वारा मामलों का निपटान दो मास की अवधि के भीतर करना आवश्यक है। जिन जिलों में बलात्कार, छेड़-छाड़ और मानसिक उत्पीडऩ के 50 या इससे अधिक मामले अदालतों में लंबित हैं, उनमें छ: फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने के संबंध में बताया गया कि यह मामला पहले ही उच्च न्यायालय में उठाया जा चुका है। राज्य सरकार ने इन फास्ट ट्रैक कोर्टों के लिए पहले ही आवश्यक सहायक स्टाफ की स्वीकृति दे दी है और इन्हें जल्द ही स्थापित कर दिया जाएगा।

यह भी निर्णय लिया गया कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा जहां अनुसूचित जातियों से संबंधित लोगों के विरूद्घ अपराध के कारणों का पता लगाने के लिए  सामाजिक पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा, वहीं पुलिस विभाग विशेष रूप से जिला हिसार, भिवानी, कैथल और रेवाड़ी में हत्या, हत्या के प्रयास और चोट पहुंचाने के मामलों में वास्तविक मकसद का विश्लेषण करेगा ताकि इस दिशा में आवश्यक कदम उठाए जा सकें।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि सेप्टिक टैंक की सीवर लाइनों की सफाई के दौरान मृत्यु के मामलों को रोकने के लिए, सीवरमैन को स्किलिंग से जोड़ा जाएगा और कार्य करने के लिए आवश्यक कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। केवल पंजीकृत और आवश्यक प्रशिक्षण प्रमाणपत्र रखने वाले सीवर मैन को ही सीवर में प्रवेश करने की अनुमति दी जाएगी। राज्य सरकार ने सभी पंजीकृत सीवर मैन और खतरनाक एवं जोखिम भरे कार्य करने वाले कर्मचारियों को 10 लाख रुपये का बीमा कवरेज भी प्रदान करने का निर्णय लिया है।

बैठक में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम, 1989 के प्रावधानों को सही तरीके से लागू करके अनुसूचित जातियों के सदस्यों पर होने वाले अत्याचारों को रोकने के लिए उठाए जा रहे सभी आवश्यक कदमों बारे भी जानकारी दी गई। अनुसूचित जाति के किसी भी सदस्य पर हुए अत्याचार के बारे में रिपोर्ट प्राप्त होते ही आपराधिक मामला दर्ज किया जाता है और आरोपी के खिलाफ आईपीसी की प्रासंगिक धाराओं के अलावा अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति अधिनियम, 1989 की प्रासंगिक धारा के तहत त्वरित कार्रवाई की जाती है। राज्य में अनुसूचित जातियों के खिलाफ अपराध से निपटने के लिए पुलिस मुख्यालय, पंचकूला में एक विशेष प्रकोष्ठï स्थापित किया गया है।

बैठक में बताया गया कि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत अत्याचार के शिकार बनने वाले अनुसूचित जाति के सदस्यों को 85,000 रुपये से 8.25 लाख रुपये तक की राहत प्रदान की जाती है। वर्ष 2018-19 के दौरान, 31 अक्तूबर, 2018 तक 696 लोगों को 9.42 करोड़ रुपये से अधिक की राहत दी गई है। इसी प्रकार, मुख्यमंत्री सामाजिक समरसता अंतरजातीय विवाह शगुन योजना के तहत, अनुसूचित जाति के लडक़े या लडक़ी के साथ विवाह करने वाले गैर-अनुसूचित जाति की लडक़ी या लडक़े को दी जाने वाली वित्तीय सहायता को 1,01,000 रुपये से बढ़ाकर 2,50,000 रुपये कर दिया गया है। राशि को जोड़े के संयुक्त बैंक खाते में तीन साल की लॉक अवधि के लिए जमा किया जाता है। इस वर्ष की इसी अवधि के दौरान इस योजना के तहत 638 लाभार्थियों को 4.27 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की गई है। इसके अलावा, अनुसूचित जाति के लोगों को नागरिक प्रकृति के मामलों की रक्षा के लिए 11,000 रुपये की राशि दी जाती है।

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