कर्मचारियों के मुद्दे पर सदन में बोले सीएम खट्टर, हमने बहुत कुछ किया है कर्मचारियों के लिए

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Sahab Ram, Yuva Haryana

Chandigarh, 11 Sept, 2018

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि कर्मचारी सरकार और प्रशासन की रीड की हडडी होती है। जितना 4 साल की अवधि में वर्तमान सरकार ने कर्मचारियों के हित में किया है वह किसी भी सरकार ने नहीं किया है। कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने के विरूद्ध 31 मई, 2018 को दिए गए हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ हरियाणा सरकार, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, विपक्ष के नेता अभय सिंह चौटाला, हरियाणा के पूर्व महाअधिवक्ता हवा सिंह हुड्डा व कर्मचारी यूनियन के नेताओं के सहमति से महाअधिवक्ता, हरियाणा की ओर से सुप्रीम कोर्ट में 6 सिंतबर 2018 को विशेष याचिका डाली गई।

मुख्यमंत्री आज हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन बहस के बाद सदन में अपना वक्तव्य दे रहे थे।
उन्होंने कहा कि जनहित उनके लिए सर्वोपरि है और जनहित में निर्णय लेने के लिए वे अडिग रहेंगे। कर्मचारी हित में केवल मकान भत्ते को छोडक़र सभी प्रकार के भत्तों में बढ़ोतरी की गई। पहली बार दिव्यांग महिला कर्मचारियों के लिए विशेष भत्ते का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि हरियाणा ने पहले वर्ष में ही सातंवे वेतन आयोग का लाभ कर्मचारियों को दिया है, इतना ही नहीं तदर्थ दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को भी सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार 14.29 प्रतिशत बढोतरी का लाभ दिया गया है। आंगनवाड़ी हेल्पर व कर्मचारियों को कुशल व अर्धकुशल श्रेणी में लेकर आए हैं। आशा वर्कर्स को भी केंद्र सरकार की ओर से दिए जाने वाले वेतन से अलग हरियाणा सरकार 161 करोड़ रुपये वार्षिक का भुगतान करती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां तक हरियाणा परिवहन के कर्मचारियों का हड़ताल पर जाने का मामला है, उसे किसी भी हालत में सहन नहीं किया जाएगा, क्योंकि हरियाणा परिवहन के कर्मचारी नेताओं दलबीर किरमारा, सरबत सिंह पुनिया व इंद्र सिंह बधाना व अन्य ने हाईकोर्ट में एफिडेविट दिया है कि उन्हें किलोमीटर आधार पर 720 प्राइवेट बसें लेने पर कोई आपत्ति नहीं है, इसके बावजूद भी कर्मचारी हड़ताल पर गए वह गलत है और सरकार का एस्मा लागू करने पर मजबूर होना पड़ा।

उन्होंने कहा कि अब कर्मचारी नेता किलोमीटर आधारित बसों की मरम्मत हरियाणा परिवहन की कर्मशालाओं के माध्यम से करवाना चाहते हैं, जो कहीं न कहीं दाल में काला है वाली बात दर्शाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्यशाला में सूचिता बनी रहे, इसके लिए परिवहन मंत्री को विशेष निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि चाहे सरकार के माध्यम से या परिवहन के माध्यम से हमें प्रदेश की 2.70 करोड़ जनता को सेवा देना है और यही हमारा उद््देश्य है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनहित के फैसले लेने में सदैव अडिग हैं। पढ़ी-लिखी पंचायत देने के मामले में भी हम सुप्रीम कोर्ट गए और 45 दिन लगातार सुनवाई के बाद हमारे फैसले की सर्वोच्च न्यायालय ने सराहना की और अन्य राज्यों को भी इसे अपनाने का सुझाव दिया।
मुख्यमंत्री ने एक शेर के साथ कहा कि- मेरा यही अंदाज जमाने को खलता है कि यह चिराग हवा के खिलाफ  कैसे जलता है।

महाअधिवक्ता बलदेव राज महाजन ने भी सदन में अपना वक्तव्य देते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय में विशेष याचिका डालने से पहले उन्होंने विपक्षी पार्टियों के नेता व उनके विधि परामर्शी प्रतिनिधियों, पूर्व महाअधिवक्ता हवा सिंह हुड्डा के निवास पर दिनभर बैठक की, जिसमें कर्मचारी नेता भी शामिल थे। उसके बाद याचिका डालने की सहमति बनी।

उन्होंने सदन को बताया कि या तो विधानसभा में अध्यादेश लाकर कर्मचारियों को नियमित किया जा सकता था या फिर सर्वोच्च न्यायालय में उच्च न्यायालय के फैसले के विरुद्ध याचिका डाली जा सकती है। अगर हरियाणा विधानसभा में पारित अधिनियम को न्यायालय में चुनौती दी जाती और उस पर स्टे मिल जाता तो हम सर्वोच्च न्यायालय में भी याचिका नहीं डाल सकते थे और अधिनियम खत्म हो जाता। सभी पार्टियों के विधि विशेषज्ञों की यही राय थी कि पहले सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली जाए

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