शिकायत को सही साबित करने के लिए CM को भेजा 10 लाख का चैक और शपथ पत्र

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खट्टर सरकार में अफसरशाही के हावी होने की खबरें आती रहती है। लेकिन इस बार अफसरशाही से परेशान इसका एक व्यक्ति को अपनी शिकायत सही होने की गारंटी देने के लिए सी.एम. को 10 लाख रुपए का सशर्त चैक भेजना पड़ा है। उसने सी.एम. से शिकायत की जांच की मांग करते हुए कहा कि अगर उसकी शिकायत गलत पाई जाती है, तो उसका चैक मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा कर लिया जाए और उसके खिलाफ थाने में केस दर्ज करा दिया जाए। अगर शिकायत सही पाई गई तो उसे खारिज करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

असल में 2016 में गुरुग्राम के सैक्टर-5 निवासी कृष्णलाल ने सी.एम. विंडो पर एक शिकायत लगाते हुए कहा था कि पालम विहार रोड स्थित चौमाखेड़ा की गौशाला नंदीधाम की करीब एक एकड़ भूमि पर भू-माफिया ने कब्जा किया हुआ है। अधिकारियों के इशारे पर करोड़ों रुपए की जमीन पर बिल्डिंग खड़ी कर दी गई है। शिकायत में गौशाला की जमीन खाली कराने की मांग की गई थी।

नगर निगम ने जांच में शिकायत को सही मानते हुए बिल्डिंग के एक हिस्से को गिराने के आदेश जारी कर दिए थे। उनका आरोप है कि इसके बाद भू-माफिया ने अधिकारियों के साथ मिलकर जमीन की फर्जी सेल डीड दिखाकर कोर्ट से निगम के निर्णय के खिलाफ स्टे ऑर्डर ले लिए। निगम अधिकारियों ने बाद में उसकी शिकायत को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए उसकी शिकायत को डिस्पोज-ऑफ कर दिया गया।

सी.एम. को 10 लाख रुपए के चैक के साथ भेजे शपथ पत्र और शिकायत में कृष्णलाल ने कहा है कि जब कब्जाधारियों की ओर से कोर्ट में पेश किए गए सेल डीड के दस्तावेजों की जांच कराई गई, तो ये दस्तावेज फर्जी पाए गए। उसका आरोप है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कराने में राजस्व विभाग के अधिकारियों की संलिप्तता भी रही है। राजस्व और नगर निगम अधिकारियों ने इस मामले में जमकर सांठगांठ की है। यही कारण है कि गौशाला की करोड़ों रुपए की जमीन पर अवैध कब्जा बरकरार है।

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