रोबेरी के चार साल बाद सरकार ने उठाया कदम, बैंक के लॉकर्स में रखे धन और गहनों पर रखी जाएगी नज़र

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बढ़ते अपराधों के चलते प्रदेश सरकार की चिंता बढ़ती जा रही है। प्रदेश सरकार लाकर्स में रखे सामान को सुरक्षित रखने के लिए कोई नई योजना बनाने की है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने केंद्रीय वित्त मंत्री को पत्र लिखा जिसमे सीएम ने उनका ध्यान लाकर्स में रखे मूल्यवान वस्तुओं के नुक्सान का उत्तरदायित्व तय करने की तरफ दिलाया।

खट्टर ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया की लाकर्स में रखी वस्तुओं का खुलासा कराया जाना चाहिए।साथ ही कहा कि बहुमूल्य वस्तुओं का खुलासा होने से लॉकर्स को किराये पर लेने वाले लोगों के लिए बैंक आसानी से सामूहिक बिमा पॉलिसी खरीद सकते हैं।

अगर किसी कारण इसे अवैवाहिक माना जाता है तो लॉकर्स में रखे सामान को खुलासा करने का विकल्प दिया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने पत्र में कहा कि अगर बैंक लॉकर्स का बिमा नहीं कराते हैं तो भी कोई घटना होती भी है तो बैंक और सरकार को दावों का त्वरित निपटान करने में मदद मिलेगी। भारतीय रिज़र्व बैंक ने इस तरह के नुक्सान का आकलन करने के लिए अभी तक कोई मानदंड नहीं  बनाये हैं।

आपको बतादें की अक्टूबर 2014 में लुटेरों ने सोनीपत के गोहाना में पंजाब नेशनल बैंक के पड़ोस में खाली घर से बैंक तक 100 फीट लम्बी सुरंग खोदकर वारदात को अंजाम दिया था। इस दौरान बैंक के स्ट्रांग रूम में बने 360 लॉकर्स में से 86 तोड़े गए और उनमे रखा करड़ों रूपये का सामान लेकर फरार हो गए थे ।
हरियाणा के इतिहास में यह सबसे बड़ी बैंक रोबेरी थी। जिसके चार साल बाद सरकार ने कोई कदम उठाया है।

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