Home Breaking शिक्षा विभाग के फरमान के विरोध में उतरे कॉलेज शिक्षक, काले बिल्ले लगाकर किया विरोध

शिक्षा विभाग के फरमान के विरोध में उतरे कॉलेज शिक्षक, काले बिल्ले लगाकर किया विरोध

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Sahab Ram, Yuva Haryana
Chandigarh, 22 Sept, 2018

हरियाणा सरकार द्वारा जारी सातवें वेतनमान संबंधित अधिसूचना कॉलेज शिक्षकों को रास नहीं आ रही है। अब प्रदेश में हर तरफ से इसके खिलाफ आवाज उठनी शुरू हो गई है।  इसी कड़ी में आज प्रदेशभर के कॉलेज शिक्षकों ने कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन के तहत काले बिल्ले लगाकर कक्षाएं ली तथा अपना विरोध प्रकट किया।

कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन के प्रधान डॉ. राजबीर सिंह ने बताया कि कॉलेज शिक्षक वर्ग, शिक्षा विभाग द्वारा जारी पत्र क्रमांक 10/18-2012 C IV (2) दिनांक 24/4/2017 को लेकर विरोध में है जिसमें हरियाणा सरकार द्वारा जारी अधिसूचना KW/7/18-2009 C IV (3) दिनांक 27.07.2011 तथा 20.9.2012 को अधीक्षक महाविद्यालय – 4 निदेशक शिक्षा विभाग पंचकूला ने अपनी मनमर्जी माफिक अनुवाद करके पूरी अधिसूचना को ही बदल दिया है।

उन्होने कहा कि इसके संबंध में जब आरटीआई के तहत सूचना मांगी गई तो अधीक्षक महाविद्यालय – 4 ने ऐसा कोई भी दस्तावेज होने से इंकार कर दिया तथा आरटीआई नियम 6(J) का संरक्षण लेकर अपना पल्ला झाड़ लिया। जबकि यही अधिकारी पिछले डेढ़ वर्ष से शिक्षकों के पदोन्नति के मामलों को वापिस कर रहा है जिससे 2006 व 2009 के बीच नियुक्त हुए शिक्षकों में भय का माहौल है तथा सातवें वेतनमान में इनका वेतन बढ़ने की बजाय घट रहा है।

उन्होने बताया कि इसके अलावा शिक्षा विभाग पीएचडी और एमफिल की वेतन वृद्धि को भी मूल वेतन में ना जोड़ने पर अड़ा हुआ है जबकि हरियाणा सरकार अपने पत्र 24/242-2013 C-1 (4) दिनांक 18.6.2015 के द्वारा यूजीसी से स्पष्टीकरण मांग चुकी हैै तथा यूजीसी ने पत्र F/11-6/2011/(PS) दिनांक 18.8.2015 के द्वारा यह स्पष्ट कर चुकी है कि पीएचडी एमफिल की वेतन वृद्धि मूल वेतन में विलय होंगी, लेकिन कई वर्ष बीत जाने पर भी शिक्षा विभाग इसकी अनुपालनl नहीं कर रहा है जिसके कारण शिक्षकों को ना केवल विलय ना होने का नुकसान हो रहा है बल्कि सालाना वेतन वृद्धि में भी पिछले 10 वर्षों से नुकसान उठाना पड़ रहा है जो सरासर गलत है व नियम के विरुद्ध है।

कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन के प्रधान डॉ राजवीर सिंह ने बताया की उच्चतर शिक्षा विभाग ने नेट और स्लेट में भी अंतर कर दिया है। जहां नेट भारत सरकार द्वारा आयोजित होता है, स्लेट हरियाणा सरकार द्वारा करवाया जाता था। दोनों की ही हरियाणा राज्य में समान रूप से मान्य थे। परंतु शिक्षा विभाग ने इन दोनों में भी अंतर करते हुए स्लेट पास किये हुए प्राध्यापकों को भी इन्क्रीमेंट से वंचित रखा गया। शिक्षा विभाग के अनुसार स्लेट और नेट एक समान नही है। जबकि ऐसा किसी तरह का नोटिफिकेशन कभी जारी नही हुआ।

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