Home Breaking हरियाणा में कोरोना वायरस को महामारी किया घोषित, जानिये क्या-क्या होते हैं नियम ?

हरियाणा में कोरोना वायरस को महामारी किया घोषित, जानिये क्या-क्या होते हैं नियम ?

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Sahab Ram, Chandigarh

हरियाणा सरकार ने प्रदेश में कोरोना वायरस के प्रकोप और प्रसार को रोकने के लिए महामारी अधिनियम 1897 की धारा 2, 3 और 4 के तहत ‘हरियाणा महामारी सीओवीआईडी-19 विनियमन, 2020’ अधिसूचित किया है। यह अधिनियम तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है और इस अधिसूचना के प्रकाशन की तिथि से एक वर्ष की अवधि के लिए मान्य रहेगा।

इन नियमों के तहत सभी अस्पतालों (सरकारी और निजी) में सीओवीआईडी-19 के संदिग्ध मामलों की जांच के लिए फ्लू कॉर्नर होने चाहिए। ऐसे मामलों की जाँच के दौरान सभी अस्पताल (सरकारी और निजी) व्यक्ति की यात्रा का इतिहास दर्ज करेंगे यदि उसने किसी भी ऐसे देश या क्षेत्र की यात्रा की है, जहां सीओवीआईडी-19 की रिपोर्ट है। इसके अलावा, सीओवीआईडी-19 के संदिग्ध या पुष्टि मामले के संपर्क में आने के इतिहास को भी दर्ज किया जाएगा। यदि किसी व्यक्ति का पिछले 14 दिनों में ऐसा कोई इतिहास है और वह व्यक्ति स्पर्शोन्मुख है तो व्यक्ति को एक्सपोजऱ के दिन से 14 दिनों के लिए घर के भीतर ही अलग रखा जाना चाहिए।

यदि व्यक्ति का पिछले 14 दिनों में ऐसा कोई इतिहास है और सीओवीआईडी-19 की केस परिभाषा के अनुसार व्यक्ति रोगसूचक है तो उस व्यक्ति को प्रोटोकॉल के अनुसार अस्पताल में अलग रखा जाएगा और सीओवीआईडी-19 के लिए टेस्ट किया जाएगा। ऐसे सभी मामले की जानकारी जिले के सिविल सर्जन के कार्यालय को तुरंत दी जानी चाहिए।

 

स्वास्थ्य विभाग, हरियाणा की पूर्व अनुमति के बिना कोई भी व्यक्ति, संस्था एवं संगठन सीओवीआईडी-19 के बारे में जानकारी देने के लिए किसी भी प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का उपयोग नहीं करेगा। ऐसा सीओवीआईडी-19 के संबंध में किसी भी अफवाह या अनौपचारिक जानकारी के प्रसार से बचने के लिए किया गया है। यदि कोई व्यक्ति, संस्था या संगठन ऐसी गतिविधि में संलिप्त पाया जाता है तो इसे इन नियमों के तहत दंडनीय अपराध माना जाएगा।

हरियाणा में सीओवीआईडी-19 के परीक्षण नमूने लेने के लिए किसी भी निजी प्रयोगशाला को अधिकृत नहीं किया गया है। ऐसे सभी नमूने भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार एकत्र किए जाएंगे और इन्हें स्वास्थ्य विभाग, हरियाणा द्वारा नियुक्त जिला नोडल अधिकारी द्वारा नामित प्रयोगशालाओं में भेजा जाएगा।

इन नियमों के तहत, ऐसा देश या क्षेत्र जहां से सीओवीआईडी-19 की रिपोर्ट है, से पिछले 14 दिनों की यात्रा के इतिहास वाले किसी भी व्यक्ति को निकटतम सरकारी अस्पताल को सूचित करना होगा या टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 108 पर कॉल करनी होगी ताकि स्वास्थ्य विभाग द्वारा, आवश्यक हो तो, उपायों बारे सूचित किया जा सके।

ऐसे सभी व्यक्ति, जिनका पिछले 14 दिनों में सीओवीआईडी-19 की रिपोर्ट वाले किसी देश या क्षेत्र की यात्रा का इतिहास है, लेकिन जिन्हें खांसी, बुखार, सांस लेने में कठिनाई का कोई लक्षण नहीं हैं, उन्हें स्वयं को घर पर अलग रहना चाहिए और अपने मुंह और नाक को मास्क के साथ ढककर रखना चाहिए। ऐसे व्यक्तियों को ऐसे क्षेत्रों से आने की तिथि से 14 दिनों के लिए परिवार के सदस्यों सहित किसी भी व्यक्ति के संपर्क से बचने के लिए सावधानी बरतनी चाहिए।

इन विनियमों के अुनसार, इस अधिनियम के तहत अधिकृत व्यक्तियों में राज्य स्तर पर निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं, निदेशक, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान और जिलों में उपायुक्त, सिविल सर्जन, एसडीएम और वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी तथा स्वास्थ्य सेवा विभाग द्वारा अधिकृत अधिकारी शामिल हैं।

इसी बीच, इन विनियमों की धारा 3 के अनुसार, इस अधिनियम के तहत अधिकृत व्यक्ति ऐसे किसी भी व्यक्ति को दाखिल करने और उस व्यक्ति को अलग रखने के लिए अधिकृत हैं यदि उसका उस क्षेत्र के दौरे का इतिहास है जहां सीओवीआईडी-19 स्थानिक है और संबंधित व्यक्ति रोगसूचक है।

यदि सीओवीआईडी-19 का संदिग्ध मामला दाखिल होने या अलगाव से इनकार करता है तो इन नियमों की धारा 3 के तहत प्राधिकृत अधिकारियों के पास लक्षणों की शुरुआत से 14 दिनों की अवधि तक या लैब परीक्षणों की रिपोर्ट प्राप्त होने तक या इस तरह की अवधि जो आवश्यक हो सकती है, के लिए ऐसे मामले को बलपूर्वक और अलग करने की शक्तियां होंगी।

यदि सीओवीआईडी-19 के मामलों की एक परिभाषित भौगोलिक क्षेत्र जैसे गाँव, कस्बे, वार्ड, कॉलोनी, बस्ती से सूचना मिलती है तो संबंधित जिले के जिला प्रशासन को निम्र रोकथाम उपायों को लागू करने का अधिकार होगा, लेकिन ये अधिकार इन तक सीमित नहीं, इस क्रम में रोग के प्रसार को रोकने के लिए अन्य एहतियाती उपाय भी किए जा सकते हैं, जिसमें भौगोलिक क्षेत्र को सील करना, प्रतिबंध क्षेत्र से आबादी को बाहर निकलने और प्रवेश करने को रोकना, स्कूलों एवं कार्यालयों को बंद करना, सार्वजनिक समारोहों पर प्रतिबंध लगाना और क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाना, सीओवीआईडी-19 मामलों की सक्रिय और अनिवारक निगरानी शुरू करना, अस्पताल में सभी संदिग्ध मामलों को अलग रखना और मामलों के अलगाव के लिए किसी भी सरकार या भवन को रोकथाम इकाई के रूप में नामित करना शामिल है।
सभी सरकारी विभागों का स्टाफ रोकथाम के उपायों की ड्यूटी का निर्वहन करने के लिए संबंधित क्षेत्र के जिला प्रशासन के अधीन होगा।  उपायुक्त की अध्यक्षता में जिला आपदा प्रबंधन समिति अपने संबंधित जिलों में सीओवीआईडी-19 के लिए रोकथाम उपायों के बारे में योजना बनाने के लिए अधिकृत है। उपायुक्त इन विनियमों के तहत इस गतिविधि हेतु जिला आपदा प्रबंधन समिति के लिए विभिन्न विभागों से और अधिकारी ले सकते हैं।

इस बीच, यदि किसी भी व्यक्ति, संस्थान, संगठन को इन विनियमों के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन करते हुए पाया जाता है तो उसे भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 188 के तहत दंडनीय अपराध माना जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव या किसी भी जिले के उपायुक्त किसी भी व्यक्ति, संस्था, संगठन को इन नियमों के प्रावधानों या सरकार द्वारा जारी किए गए किसी भी अन्य आदेशों के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए पाए जाने पर दंडित कर सकते हैं।

इस अधिनियम के तहत भलाई के लिए किए गए या किए जाने वाले किसी भी कार्य के लिए किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कोई भी मुकद्दमा या कानूनी कार्यवाही नहीं की जाएगी  जब तक कि यह अन्यथा सिद्ध न हो जाए।

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