‘लिव- इन’ पर नो ऑब्जेक्शन, कम उम्र के शादी- शुदा जोड़े भी रह सकेते हैं साथ – सुप्रीम कोर्ट

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Shweta Kushwaha, Yuva Haryana

Chandigarh, 6 May, 2018

सुप्रीम कोर्ट ने साफ- साफ कह दिया है कि विवाह हो जाने के बाद किसी भी कीमत पर उसे रद्द नहीं किया जा सकता। वर- वधू की कम उम्र या विवाह योग्य उम्र न होने पर भी जोड़ा लिव- इन में रह सकता है। इससे विवाह पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट के एक फैसले को पलटते हुए ये फैसला सुनाया है। कोर्ट का कहना है कि सभी को अपना जीवन साथी चुनने का पूरा- पूरा अधिकार है। कोई भी कोर्ट, संगठन या कोई संस्था इस अधिकार को किसी से भी छीन नहीं सकती।

कोर्ट ने कहा है कि अगर लड़का 21 से कम है, तो भी वो अपनी पत्नी संग लिव- इन में रह सकता है। जोड़े के साथ में रहने पर कोई भी उन्हें रोक नहीं सकता, चाहे उनकी उम्र विवाह योग्य न हो।

सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट के एक विवाह को रद्द करने पर ये फैसला सुनाया है , जिसमें लड़की की उम्र विवाह योग्य नहीं थी। लड़की 19 साल की थी और लड़का 20 साल का। लड़के की कम उम्र होने पर लड़की के पिता ने लड़के पर अपहरण का मुकदमा दर्ज करवा था।

जिसके बाद कोर्ट ने पुलिस को हैबियस कॉरपस के तहत लड़की को अदालत में पेश करने के निर्देश दिए थे और पेशी के बाद कोर्ट ने शादी को रद्द कर दिया था। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को रद्द कर ये टिप्पणी की है।

 

 

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