पंजाब- हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा- विवाह की वैधता का प्रमाण मैरिज सर्टिफिकेट नहीं रीति- रिवाज हैं

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Yuva Haryana
Panchkula, 23 April, 2018

पंजाब- हरियाणा हाईकोर्ट ने फैसला देते हुए कहा है कि किसी भी विवाह को वैध मामने के लिए सिर्फ मैरिज सर्टिफिकेट होना ही काफी नहीं है।
एक संपूर्ण विवाह की मुहर तब लगेगी,जब वो पूरे रीति- रिवाजों से हुआ हो। बकायदा सात फेरे हुए हों,तभी वो एक वैध विवाह माना जाएगा। वैध मानने के लिए हिन्दू रीति-रिवाजों से उसका संपन्न होना बेहद जरूरी है।

अगर कोई ये साबित नहीं कर पाता कि उसके सात फेरे हुए हैं,तो फिर मैरिज सर्टिफिकेट को विवाह की वैधता साबित करने के लिए सबूत के तौर पर नहीं माना जा सकता।
पंजाब- हरियाणा हाईकोर्ट ने जिला अदालत के खिलाफ ये फैसला तब सुनाया जब एक याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में हाईकोर्ट से पंचकूला अदालत से जारी तलाक की डिक्री को खत्म करने का आग्रह किया था।

पत्नी ने अदालत में तलाक मांगा था, जिस पर पंचकूला अदालत ने पत्नी के ही हक में फैसला दिया था। इसके खिलाफ पति ने हाईकोर्ट में याचिका दी थी।
पति तालाक नहीं चाहता था, उसने कोर्ट में मैरिज सर्टिफिकेट भी दिखाया था। वहीं पत्नी पत्नी की ओर से कहा गया कि पति उसे मंदिर में ले गया था,लेकिन वहां मैरिज सर्टिफिकेट पर साइन कराए थे। न तो सात फेरे हुए और न ही वो एक भी दिन उसके साथ रही।

हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मैरिज सर्टिफिकेट को शादी के सुबूत के तौर पर नाकाफी बताया और जिला अदालत के तलाक के आदेशों को सही माना। हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि दोनों के बीच तलाक का आदेश सही है।

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