प्रदेश में नहीं हो रहा गौमाता का सही से पोषण, मौत के बाद बेची जा रही चमड़ी

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Shweta Kushwaha, Yuva Haryana

Chandigarh, 5 June, 2018

गौमाता को हमारे समाज में काफी ऊंचा दर्जा दिया गया है। कुछ लोग इनकी पूजा करते हैं, तो कुछ इनकी चमड़ी और हड्डी निकालने से बाज नहीं आते हैं।

हरियाणा सरकार ने सड़कों पर घूमने वाली बेसहारा गायों और सांडों को नंदीशालाएं बनाकर आश्रय तो दिया, लेकिन कहीं न कहीं ये भी बस लोगों के सामने एक दिखावे जैसा ही है। क्योंकि पुख्ता इंतजाम न होने से नंदीशालाओं में कैद सैंकड़ों गायों की हर रोज मौत हो रही हैं।

इतना ही नहीं गौमाता के मृत शरीर को दफनाने के बजाय, यहां तो कुछ और ही खेल चल रहा है। जहां पर उनकी चमड़ी और हड्डी को निकालने के लिए बेच दिया जाता है। बता दें कि रोहतक में पूरा पोषण न मिलने से हर रोज 15 से 20 गाय दम तोड़ रही हैं।

गाय के मृत शव को गौशालाओं से ठेकेदार के कारिंदे उठाकर ले जाते हैं। जिसके बाद हडवारों में लेजाकर उनकी चमड़ी और हड्डियां निकाल ली जाती हैं,  इसके लिए नगर निगर द्वारा टैंडर जारी किया जाता है।

2015 में गौवध कानूनी तौर पर दंडनीय अपराध घोषित कर दिया गया था। जिसपर 3 से 10 साल तक की सजा सुननाई गई थी, साथ ही 1 लाख तक का जुर्माना भी लगाया गया।  इसके अलावा गौवध की नियत से निर्यात करना, गौमांस रखना, परोसना को लेकर भी कठोर दंड का प्रावधान किया गया।

बेसहारा गायों के लिए भी आश्रय स्थल बनाने और उनकी देख- रेख के लिए गोसेवा आयोग का भी गठन किया गया , ताकि प्रदेश के अन्दर गौमाता की बेकद्री रूक सके। लेकिन इन सख्त कानून के बाद भी गायों की बेकद्री होनी नहीं रूक रही है।

 

 

 क्यों हो रही है गायों की मौत –

रोहतक में नंदीशाला की क्षमता 1500 के आसपास है, लेकिन फिलहाल यहां 2700 के आसपास गाय और सांड रखे गए हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि पशुओं की इतनी संख्या होने के बावजूद यहां सिर्फ दो शैड हैं, जिनके नीचे आधे पशु भी नहीं आ सकते। ज्यादातर खुले आसमान के नीचे 45 डिग्री तापमान में तपते रहते हैं। जिस कारण हर रोज कई गऊओं की मौत भी हो जाती है।

लेकिन लापरवाही को छुपाने के लिए गौशाला के संचालक कहते हैं कि ये सभी स्ट्रे कैटल हैं और इनके शरीर में पॉलीथिन होने के कारण ये मर जाते हैं।

संचालकों का कहना है कि शैड देखना नगर निगम का काम है, उनका सिर्फ चारा- पानी और देखभाल का ही काम है। नगर निगम ने टैंडर दिया हुआ है, जब भी किसी गाय की मौत होती है, तो ठेकेदार के आदमी आकर शव को ले जाते हैं और उनकी चमड़ी उतार दी जाती है।

जबकि ये को हर कोई जानता है कि पशुओं के लिए शैड होना जरूरी है और जब तक ुन्हें सही से पोषण नहीं मिलेगा , तो ये स्वस्थ कैसे रहेंगी ?

 

 

 

 

 

 

 

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