हरियाणा में रोज मर्डर की 3 घटनाएं, सरकार और विपक्षी दलों ने साधी चुप्पी

अनहोनी बड़ी ख़बरें राजनीति हरियाणा
Yuva Haryana News
@ Mahender Singh
हरियाणा में दिनोदिन अपराधा का ग्राफ बढ़ता जा रहा है और कहीं ना कहीं रोजाना मर्डर, डकैती, लूट की वारदातें सामने आ रही है। हाल ही में अपराध को लेकर आई एक रिपोर्ट ने प्रदेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। रिपोर्ट के मुताबिक हरियाणा में औसतन रोजाना तीन मर्डर की घटनाएं हो रही है।  कुछ ऐसी रिपोर्ट और तथ्यों के आधार पर पत्रकार महेंद्र सिंह का यह लेख पढ़िये
“ये लेख सिर्फ़ जनता के लिए है, उनकी जान जाने पर चुप्पी साधने वाले नेताओं के लिए नहीं
वारदात और हादसे, सिर्फ़ दूसरों के साथ नहीं होते, आपके साथ भी हो सकते हैं। आजतक आपके साथ नहीं हुए तो ये आपकी क़िस्मत है। ऐसा कोई सिस्टम या गारंटी नहीं है कि ये आपके साथ ऐसा कभी नहीं होगा। दिनचर्या का हिस्सा बन चुके हादसों और वारदातों को महज़ ख़बर और दूसरों की क़िस्मत समझने वाले हरियाणावासियों आगाह हो जाओ।
लगेगी आग तो आएंगे घर कई ज़द में,
यहां पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है।
जनवरी में दिन 31 थे लेकिन हत्याएं 70 हुईं। फ़रवरी में दिन महज़ 28 थे लेकिन क़त्ल 69 हुए। मई में 102 लोगों का मर्डर हो गया। कुल मिलाकर इस साल जून महीने तक 510 लोगों की हत्या कर दी गई। 6 महीने में 510 यानी रोज़ लगभग 3 लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया। आंकड़े बता रहे हैं कि ये आंकड़े हर साल बढ़ रहे हैं। सबसे ज़्यादा मर्डर के मामले में हरियाणा पूरे देश में तीसरा राज्य बन गया।
किसी को घर में घुसकर मारा गया तो किसी को बीच सड़क पर। किसी को रात के अंधेरे में मारा गया तो किसी को दिन के उजाले में। किसी को कोर्ट में निपटाया तो किसी को थाने में। किसी को सरेआम तो किसी को गुमनाम तरीक़े से। किसी की सीसीटीवी फ़ुटेज सामने आईं तो किसी की सिर्फ़ लाश। आपके आसपास रोज़ 3 जानें जा रही हैं।
हाल ही में छपी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस छोटे से राज्य पर 2014 में 79,947 तो 2015 में 84466 और 2016 में 88527 केस दर्ज़ होने की तोहमत लगी। आपको पता भी नहीं चला कि कब हरियाणा ऑवरऑल क्राइम रेट में चौथा सबसे ख़राब राज्य बन गया। आपको पता नहीं चला क्योंकि आपके सियासी सरदार आपको हिंदू-मुस्लमान की घुट्टी पिला रहे थे या जाट-नॉन जाट का जलपान करवा रहे थे। कोई साइकिल यात्रा में आपसे पैडल मरवा रहा था। कोई रथ के पहिए धकवा रहा था तो कोई जल युद्ध में आपको जेल भिजवा रहा था।
इन हत्याओं के ख़िलाफ़ आपके सियासी सरदारों में से ना किसी ने हरियाणा बंद बुलाया, ना किसी ने साइकिल यात्रा निकाली और ना किसी ने रथ यात्रा। ना किसी ने हिंदू-मुस्लमान का रोना रोया और ना किसी ने जाट-नॉन जाट का विलाप किया। छोड़िए ये सब!  किसी ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस तक नहीं की। पता है क्यों? क्योंकि ये सिर्फ़ आपकी जानें जा रही हैं, आम आदमी की जानें जा रही हैं।
आपके सियासी सरदारों का ना तो आजतक कभी कुछ बिगड़ा है और ना आगे कभी कुछ बिगड़ेगा। आप पर कोई गोली चलाए या तलवार, एक हवलदार भी बचाने नहीं आएगा लेकिन अगर सियासी आकाओं पर कोई स्याही भी फेंक देगा तो केंद्रीय सुरक्षबलों तक की हाज़िरी लग जाएगी।
क्या कभी आपने ध्यान दिया? जब-जब लॉ एंड ऑर्डर की बात चलती है तो सत्ता में तो सन्नाटा छा ही जाता है, लेकिन विपक्ष की भी सांसे अटक जाती हैं। मालूम है क्यों? क्योंकि लॉ एंड ऑर्डर की ज़िम्मेदारी गृह मंत्री की होती है। और मुख्यमंत्री ही हमारे गृह मंत्री हैं। और मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ बोलने में दबंग जलयोद्धा हों, रथ पर सवाल अर्जुन हों या साइकिल पर सवार अवतार… सबकी सांसे ऊपर-नीचे होने लगती हैं। ये लोग उतना ही बोलेंगे जितनी इनको इजाज़त है। ना इससे एक शब्द ज़्यादा और ना एक शब्द कम। ना इनके पास कोई आंकड़े होते हैं ना किसी वारदात का रेफरेंस। ना इनकी बात में पीड़ित का दर्द झलकता है ना सत्ता से कोई नाराज़गी। रटे-रटाये सेंटेंस होते हैं इनकी ज़ुबान पर। यही कि क़ानून व्यवस्था का बुरा हाल है, सरकार नाम की कोई चीज़ नहीं, आने वाले चुनाव में जनता सबक सिखाएगी, बस। ऐसे शब्दों से न सत्ता को कोई परेशानी होती और जवाब देने की ज़रूरत।
हमें ख़ुशी होगी अगर विपक्षियों में से कोई तुर्रमख़ां इस बात को ग़लत साबित करें। वो साबित करें कि वो मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ बोलने से नहीं डरता। कोई तो नेता आगे आये और हरियाणा में बढ़ते क्राइम पर गृहमंत्री की भूमिका पर सवाल उठाए, कोई प्रेस कॉन्फ़्रेंस करे, कोई धरना-प्रदर्शन करे, कोई यात्रा निकाले, जेल भरे या भूख हड़ताल करे। लेकिन इसकी उम्मीद बहुत कम है।
ख़ैर, इनकी तो सियासी, व्यवसायी और अदालती मजबूरियां हैं। लेकिन आम जनता, आपकी तो जान का सवाल है। आप क्यों चुप हैं? बार-बार हरियाणा का जल जाना, रोज़ 3 लोगों की हत्या हो जाना, बिहार और  यूपी से भी बदत्तर हालात हो जाना और सरकार पर सवाल नहीं उठाना… क्या आपको नहीं खलता? क्या सियासी पार्टियों की तरह आप लोगों को भी नहीं लगता कि क़ानून व्यवस्था कोई मुद्दा है? ठीक है आप घरों से नहीं निकल रहे! लेकिन कम से कम सोशल मीडिया पर तो बोलिये, जिसपर आप देश दुनिया के हर मसले पर चर्चा करते हैं। क्या आपको ये वारदातें, ये हत्याएं मंज़ूर हैं? मंज़ूर हैं तो कब तक? जबतक ये दूसरों के साथ हो रही हैं? लेकिन जब आपके साथ होंगी तो…?”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *