चंडीगढ़ में आखिरकार क्यों बढ़ रहा है अपराध???

देश हरियाणा

लगातार बढ़ती स्नैचिंग की वारदातों से पब्लिक, खास तौर पर महिलाएं और सीनियर सिटीजन खौफ के साये में जी रहे हैं। अब तो स्नैचिंग का खौफ इतना बढ़ गया है कि महिलाएं ज्यूलरी पहनकर घर से बाहर निकलने में भी डरती है।

पुलिस के लिए हर स्नैचिंग सिर्फ एक केस है, लेकिन लोगों की चेन लुट रही है और चैन भी। जाहिर सी बात है कि स्नैचिंग के बाद वह छीनी गई चेन ज्वेलर को बेचते हैं। पुलिस स्नैचर्स को तो पकड़ती है, लेकिन चोरी की चेन खरीदने वाले ज्वेलर्स पर नकेल नहीं कसती।

2017 में पुलिस ने 76 स्नैचरों को दबोचा, जबकि सिर्फ 3 ज्वेलर ही पकड़े गए, वह भी क्राइम ब्रांच ने पकड़े। ज्वेलर अच्छी तरह जानते हैं कि वह स्नैच की हुई चेन खरीद रहे हैं, क्योंकि ऐसी चेन टूटी हुई होती है। ज्वेलर इसे सस्ते दाम पर खरीदते हैं।

स्नैचर पकड़े़ जाते हैं और कोर्ट से बच निकलते हैं, क्योंकि स्नैचिंग के शिकार लोग उन्हें पहचानने से ही इनकार कर देते हैं। 100 में से 88 मामलों में विक्टिम ने कोर्ट में आरोपी की शिनाख्त नहीं की। सिर्फ 12 ने ही स्नैचर को पहचाना। वहीं, पिछले दो सालों में यूटी पुलिस का स्नैचिंग के आरोपी को सजा दिलाने का सक्सेस रेट सिर्फ 40 फीसदी है।

यानी हर 10 में से 6 स्नैचर बाइज्जत बरी हो जाते हैं। शहर में स्नैचिंग के बाद पुलिस स्नैचरों के पीछे लगती है, लेकिन इसकी जड़-नशे को खत्म करने की कोशिश कभी नहीं की गई। स्नैचिंग की सिर्फ एक वजह है नशा, जो शहर में खुलेआम बिक रहा है। इस साल अब तक 16 स्नैचर पकड़े गए, जिनमें 11 स्नैचर नशे के आदी हैं। नशे के लिए ही ये स्नैचिंग करते थे।

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