CRPF के इस जवान के कारण नाकाम हुआ था आतंकी हमला, DG करेंगे सम्मानित

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श्रीनगर के करन नगर में आतंकियों के खिलाफ शुरू हुआ एनकाउंटर लगभग 30 घंटे बाद खत्म हो गया। इस हमले में आतंकियों के निशाने पर करन नगर का सीआरपीएफ का कैंप था। लेकिन गेट पर तैनात संतरी रघुनाथ की मुस्तैदी के चलते होने से इस हमले को टाल दिया गया। 30 घंटे तक चली इस मुठभेड़ में सीआरपीएफ के जवानों ने दो आतंकियों को मार गिराया। जबकि आतंकियों के साथ मुठभेड़ में एक जवान भी शहीद हो गया है।

तो वहीं रघुनाथ ने बताया कि उसकी मोर्चे पर ड्यूटी 4 से 6 बजे की थी। करीब आधे घंटे बाद ही उसे कुछ आवाजें सुनाई दीं। झांका तो कोई नहीं दिखा। कुछ देर बाद फिर आवाज आई। फिर कोई नहीं दिखा। काफी अंधेरा था। बर्फबारी भी तेज हो गई थी। अब मैं सतर्क हो गया था। कुछ समय बाद दो लोग दिखाई दिए। उनमें से एक पिट्‌ठू बैग लिए था। दोनों के पास हथियार थे। एके-47 जैसा ही कुछ था। पहले दिमाग में आया कि सबको अलर्ट कर दूं, लेकिन अलर्ट करता तो ये लोग ग्रेनेड फेंक देते। बहुत नुकसान होता।

अब मेरे पास एक ही विकल्प था। मैंने करीब 20 फिट की दूरी से गोली चला दी। उनमें से एक को गोली लगी, लेकिन अंधेरे और खराब मौसम का फायदा उठा कर वो रेंगकर भागने लगे। मैंने फिर उसी दिशा में गोली चलाई और इस बार गोली चलाना जारी रखा। करीब 25 राउंड से ज्यादा गोलियां चलाईं। उस वक्त ठीक पौने पांच बजे थे। सब अलर्ट हो गए। उसी समय सबने घेरा डाल लिया। बटालियन की क्विक एक्शन टीम, 45 बटालियन और वैली क्युएटी भी पहुंच गई और यहां से हमने आतंकियों को घेर लिया।

सीआरपीएफ के डीजी आरआर भट्टनागर में भी रघु की बहादुरी की जमकर तारीख की और उन्हें एनकाउंटर खत्म होने के बाद उनकी बहादुरी के लिए सम्मानित करने की घोषणा भी की। बता दें कि 27 वर्षीय रघुनाथ महाराष्ट्र के बुलढाना जिले के नंदुरा गांव का रहने वाला है।

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