आंधी में उखड़े पेड़ को किया गया खड़ा, दोबारा से हो उठा हरा- भरा

Breaking कला-संस्कृति चर्चा में बड़ी ख़बरें हरियाणा हरियाणा विशेष

Pradeep Dhankhar, Yuva Haryana

Bahadurgarh, 24 July, 2018

जुनून हो तो बहादुरगढ़ के पर्यावरण प्रेमियों जैसा, जिन्होंने जमींदोज हो चुके वट वृक्ष को फिर से हराभरा कर दिया। इनकी यह जिद हर किसी को प्रेरित कर रही है। बता दें कि वृक्ष दो माह पहले आई तेज आंधी में जड़ से उखड़ कर धराशायी हो गया था।

हमारे जीवन के लिए हर एक पेड़ जरूरी है। चाहे वह प्रकृति की मार के चलते गिर ही क्यों ना गया हो। उसे भी दोबारा खड़ा किया जा सकता है। हरियाली के प्रति लगाव रखने वाले बहादुरगढ़ के दुकानदारों ने उखड़ कर गिर चुके वट वृक्ष को नया जीवन दिया है।

दुकानदारों ने पेड़ के 12 फीट के तने को फिर से जमीन में रोपकर खड़ा किया और सिंचाई शुरू की तो दो माह के अंदर यह हरा- भरा होने लगा। अब वह दिन भी दूर नहीं, जब यह पेड़ उतनी ही छांव और प्राणवायु इन दुकानदारों को देगा, जितना पहले देता था।

यह पेड़ दुकानदारों को बरसों से छांव दे रहा था। इसका यूं चले जाना दुकानदारों को दुखी कर गया। नियति के इस लेखे को उन्होंने स्वीकार नहीं किया और अपने प्रिय वृक्ष को नवजीवन देने को आतुर हो उठे। यहीं से जिद पैदा हुई। कई दुकानदार एकजुट हुए। उखड़े पेड़ का जड़ से लेकर 12 फीट तक का तना अलग किया। गड्ढे से मिट्टी निकाली। जेसीबी से और गहरी खोदाई की गई।

उसमें इस तने को रोपा गया। मिट्टी को पेड़ के इर्द-गिर्द भरा गया। बल्लियों और रस्सों का सहारा भी दिया। चारों तरफ ईंटों का चबूतरा बना दिया, ताकि यह तना हिल भी न पाए। दुकानदारों ने इसे दिन-रात सींचा। हर सुबह दुकान खोलने से पहले इस तने की खैरियत जानी गई।

आखिरकार इन दुकानदारों के जुनून के आगे प्रकृति ने जीवन चक्र को वापस मोड़ दिया। दो माह के भीतर ही नन्हीं पत्तियां नवजीवन का सुसंदेश देतीं दिखने लगीं।

आज जब इंसानी जज्बात खत्म हो चले हैं, यह घटना बड़ा संदेश देती है। संदेश नवजीवन का, संदेश प्रकृति प्रेम का, प्रकृति के महत्व और संरक्षण का। ऐसी जिद और जुनून हर दिल में हो तो प्रकृति में नवजीवन का संचार होते देर नहीं लगेगी। प्रदूषण मुक्त और खुशहाल जीवन का निर्माण हो सकेगा।

वृक्ष के फिर से हरा- भरा होने में कुछ भी आश्चर्यजनक नहीं है, यह तो उसकी खूबी है, लेकिन दुकानदारों का प्रकृति के प्रति यह लगाव काबिले तारीफ है। जिन्होंने जमींदोज हो चुके वट वृक्ष को फिर से हराभरा कर दिया। हमे भी इनसे प्रेरणा लेनी चाहिए और प्रकृति संरक्षण में सहयोग देना चाहिए, ताकि हम अपनी आने वाली पीढीयों को प्रदूषण मुक्त वातावरण दे सकें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *