दादूपुर नलवी नहर केस की सरकार ने नहीं की पैरवी, इसलिए योजना हुई डिनोटिफाई- सुरजेवाला

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दादुपूर नलवी नहर को लेकर एक बार फिर कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोला है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के मीडिया प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने हरियाणा सरकार द्वारा दादुपूर नलवी परियोजना को डिनोटिफाई करने की कड़ी निंदा करते हुए इसे उत्तरी हरियाणा के किसानों के साथ अन्याय और धोखा बताया है। उन्होंने कहा की प्रदेश सरकार ने राष्ट्रपति कार्यालय के सामने दादुपूर नलवी परियोजना के सही तथ्य न रखते हुए यह फैसला करवाया है।

सुरजेवाला ने कहा कि पांच महीने पहले जब किसानों के प्रतिनिधिमंडल के साथ वे राष्ट्रपति से मिले थे तब राष्ट्रपति जी ने किसानों की बात सुने बगैर निर्णय न लेने की बात कही थी, लेकिन लगता है की सरकार ने राष्ट्रपति कार्यालय के सामने ग़लत तथ्य रख दिए है, जो किसानों के साथ अन्याय किया है।

उन्होंने कहा की भाजपा सरकार पूरी तरह से किसान-विरोधी है। एक तरफ सरकार उत्तरी हरियाणा की जीवन रेखा दादुपूर नलवी नहर परियोजना को डिनोटिफाई कर रही है दूसरी ओर इसी अधिग्रहित जमीन पर सड़क का निर्माण करके किसानों के साथ धोखा कर रही है।

सरकार के इस फैसले से अंबाला, यमुनानगर और कुरुक्षेत्र जिलों के 225 गांवों की लगभग एक लाख हेक्टेयर जमीन को सिंचाई वंचित होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सरकार के इस फैसले से एक बार फिर सिद्ध हो गया है कि उसे गरीबों और किसानों के हितों से कोई सरोकार नहीं है।

उन्होंने बताया है कि 1985 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने दादुपूर नलवी नहर परियोजना आरंभ की थी। 2005 में कांग्रेस ने ही एक बार फिर से इस योजना को चालू किया और किसानों को नहरी पानी उपलब्ध करवाने व भूजल स्तर उठाने के लिए हरियाणा सरकार द्वारा 1,019 एकड़ जमीन को अधिग्रहित किया गया। जमीन अधिग्रहण के लिए प्रदेश सरकार द्वारा अभी तक लगभग 200 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका था।

इसके अलावा सिंचाई विभाग द्वारा इन नहरों को बनाने में 111 करोड़ 17 लाख रु खर्च किए और पीडब्लूडी विभाग द्वारा भी सड़कें बनाने में लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च किए गए। अब सरकार द्वारा परियोजना रद्द किये जाने से प्रदेश की जनता के खून पसीने से खर्च सारा निवेश बेकार हो जाएगा ।

सुरजेवाला ने बताया कि सितम्बर 2017 मे प्रदेश की खट्टर सरकार की केबिनेट मीटिंग में इस परियोजना को डिनोटिफाई करके राष्ट्रपति के पास इस परियोजना को रद्द करने का बिल भेज दिया, जिसे राष्ट्रपति ने लम्बे समय तक मंजूरी नहीं दी थी, लेकिन अब मंजूरी दिलाई गयी है। जिससे किसानों को इसका नुकसान उठाना पड़ा है।

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