एसडीओ भर्ती की तरह जेई भर्ती में भी हरियाणा के युवाओं का हक छीन रही खट्टर-2 सरकार -दीपेन्द्र हुड्डा

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Sahab Ram, Yuva Haryana
Chandigarh, 21 Nov, 2019

कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य दीपेन्द्र हुड्डा से आज छात्रों का एक प्रतिनिधिमंडल मिला और बताया कि हरियाणा में जेई के 1624 पदों के लिये चल रही भर्ती प्रक्रिया में हरियाणा के युवाओं के साथ सामाजिक-आर्थिक मापदंडों के नाम पर अन्याय हो रहा है तथा अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों को दस्तावेज सत्यापन के चरण में मात्र सेल्फ डिक्लेरेशन लेकर इस मापदंड में समान अंक दिये जा रहे हैं, जो कि नियमों के हिसाब से भी गलत है। हरियाणा के युवाओं के लिये 75 प्रतिशत रोजगार आरक्षित करने का वादा करने वाले इस मुद्दे पर चुप्पी साधे बैठे हैं। इस पर दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि जिस तरह एसडीओ भर्ती में हरियाणा से बाहर के लोगों को फायदा हुआ उसी तरह खट्टर-2 सरकार हरियाणा के युवाओं के हितों को छीनने का प्रयास कर रही है। उन्होंने छात्रों को भरोसा दिलाया कि इस मुद्दे को जोर-शोर से विधानसभा में उठाया जायेगा। दीपेंद्र हुड्डा ने सरकार से मांग करी कि हरियाणा निवासी अभ्यर्थियों की शिकायतों का समाधान होने तक जेई भर्ती का अंतिम परिणाम घोषित न किया जाए और हरियाणा के डोमिसाइल को प्राथमिकता दी जाए।

छात्रों के प्रतिनिधिमंडल ने कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य दीपेंद्र हुड्डा को इसके बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि हरियाणा में चल रही जेई भर्ती की प्रक्रिया के तहत दस्तावेजों का सत्यापन हो रहा है जो कि संभवतः कल तक खत्म हो जायेगा। इस प्रक्रिया में सामाजिक-आर्थिक मापदंडों के तहत 5-10 नंबर, जो अब तक की भर्तियों में चाहे वह ग्रुप-डी की भर्ती हो या हरियाणा पुलिस की भर्ती रही हो केवल हरियाणा के अधिवासियों को ही दिये जाते थे; लेकिन, अब जबकि जेई भर्ती की पूरी प्रक्रिया अंतिम दौर में है तो नियमों में फेरबदल कर बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों से मात्र सेल्फ डिक्लेरेशन लेकर 5-10 नंबर दिये जा रहे हैं। इससे साफ है कि सरकार की मंशा नौकरियों में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने और बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों को जेई के पदों पर लगाने की है।

छात्रों ने यह भी बताया कि इन पदों पर आवेदन फॉर्म भरने के समय सामाजिक-आर्थिक मापदंडों वाला खंड केवल हरियाणा निवासी छात्र ही भर पा रहे थे। विज्ञापन संख्या 10/2019 व अधिसूचना में भी साफ लिखा हुआ है कि सामाजिक-आर्थिक मापदंडों के साथ ही हरियाणा का अधिवास प्रमाण देना अनिवार्य है। इतना ही नहीं, नोटिफिकेशन में भी स्पष्ट तौर पर लिखा गया था कि आवेदन फॉर्म भरते समय जो दस्तावेज लगाये जायेंगे वही दस्तावेज, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के समय मान्य होंगे। लेकिन अब, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के समय बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों से भी पिछली तारीख में सेल्फ डिक्लेरेशन भरवाकर सारे नियम-कायदे ताक पर रखकर नंबर दिये जा रहे हैं।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल छात्रों ने आरोप लगाया कि पिछली तमाम भर्तियों में बाहरी छात्रों को इस वर्ग में नंबर इसलिये नहीं दिये गये क्योंकि चुनाव सर पर थे। अब जबकि चुनाव खत्म हो चुके हैं और भाजपा-जजपा सरकार सत्ता में आ चुकी है तो हरियाणा निवासी छात्रों के साथ अन्याय शुरु हो गया है। छात्रों ने ये भी कहा कि हरियाणा बेरोजगारी के मामले में पूरे देश में नंबर-1 पर पहुंच गया है और यहां 28.7 प्रतिशत के साथ सबसे ज्यादा बेरोज़गारी दर है। ऐसे में हरियाणा के मूल निवासी छात्रों के हितों पर कुठाराघात सही नहीं है। दक्षिण भारत एवं पूर्वोत्तर के राज्यों सहित अन्य राज्य, पंजाब, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, महाराष्ट्र अपने राज्य के युवाओं के हितों की रक्षा करते हैं। जबकि, हरियाणा में भीषण बेरोजगारी झेल रहा युवा सरकार की भेदभावपूर्ण नीतियों का शिकार हो रहा है। प्रतिनिधिमंडल में रोहतक के अंकित, करनाल के रजत सैनी, सौंध के प्रदीप, कुरुक्षेत्र के हर्ष, श्वेता ढुल समेत सैंकड़ों अभ्यर्थी शामिल रहे।

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