दिल्ली- मुंबई एक्सप्रेस हाइवे शुरू होने से पहले ही बना विवाद का मुद्दा

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Younus Alvi, Yuva Haryana

Nuh, 24 May, 2018

नूंह से गुजरने वाले सुपर एक्सप्रेस हाइवे का सर्वे शुरू होने से पहले ही इस पर विवाद होने लगा है। लोगों का आरोप है कि पहले से हो चुके सर्वे को इससे जुड़े अधिकारियों द्वारा बदला जा रहा है। जिससे अपने लोगों को फायदा पहुंचाया जा सके।

वहीं नूंह के गांव गोलपुरी के लोगों ने इस बारे में भाजपा के जिला अध्यक्ष सुरेंद्र देशवाल को लिखित शिकायत दी है। इससे दो दिन पहले भी ग्रामीणों ने डीसी को भी शिकायत दी थी।

गांव के लोगों का कहना है कि दिल्ली- मुंबई एक्सप्रेस हाइवे जो केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित किया गया है, वो मेवात के करीब 84 गांव से गुजर रहा है। इस हाईवे के सर्वे की जिम्मेदारी रिटायर्ड पटवारी, गिरदावर और तहसलदारों को दी गई है। उनके गांव गोलपुरी से गुजरने वाले हाईवे का सर्वे दो बार हो चुका था। उस समय उनकी जमीन इसमें जा रही थी।

सर्वे होने के समय पटवारी और तहसीलदार ने गोलपुरी गांव में नए बन रहे मकानों को रूकवा दिया था और किसानों को जमीन न बोने की हिदायत भी दी थी। अधिकारियों के आदेश पर उन्होंने जमीन पर कोई बिजाई नहीं की है।

भाजपा के जिला अध्यक्ष को सौंपे पत्र में कहा कि इस सर्वे में उनके गांव का भी एक रिटायर्ड अधिकारी शामिल है। कुछ दिन पहले जब तीसरी बार गांव का सर्वे हुआ, तो एक अधिकारी के कहने पर सर्वे को दूसरी जगह से बदल दिया गया।

उनका आरोप है कि गोलपुरी गांव का ही एक रिटायर्ड पटवारी सर्वे टीम का सदय है, जिसने अपनी और मिलने वाले लोगों की जमीन में से एक्सप्रेस हाइवे को घुमा दिया। अब जहां से एक्सप्रेस हाइवे निकालने की बात हो रही है, वहां पर कब्रिस्तान और दरगाह भी आ रही है।

ग्रामीणों ने कहा कि जहां से पहले सर्वे किया था ,वहां कब्रिस्तान, मदरसा,मस्जिद जैसी कोई चीज नही आ रही थी और न ही आबादी थी। उन्होंने कहा कि अगर उनकी मांग पर गौर नहीं किया गया, तो मजबूर होकर उनको अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा।

 

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