Home चर्चा में हरियाणा के धर्मवीर कभी चलाते थे रिक्शा, बने सांइटिस्ट और विदेशों ने मनवाया अपना लोहा

हरियाणा के धर्मवीर कभी चलाते थे रिक्शा, बने सांइटिस्ट और विदेशों ने मनवाया अपना लोहा

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Yuva Haryana

Haryana,23-04-2018

हरियाणा के यमुनानगर के धर्मवीर कंबोज अपने आप में एक मिसाल हैं। उन्‍होंने मेहनत, जज्‍बे और काबिलियत से उन्‍नति के उस शिखर को छुआ कि इस पर  आसानी से नहीं पहुंचा जा सकता। मैट्रिेक पास धर्मवीर कंबोज कभी दिल्ली के खारी-बावली में रिक्शा चलाते थे।

इस दौरान जड़ी-बूटियों की मंडी में आना जाना रहता था। बचपन में मां को भी जड़ी-बूटियां उगाते देखा था और इसके प्र‍ति बचपन से प्रेम था। दिल्‍ली में इस कारोबार को देखकर बचपन की सोई ललक जाग गई और फिर गांव आकर किसानी शुरू कर दी। इसके बाद खेती को आधुनिक बनाने के लिए कृषि यंत्र बनाने लगे और बन गए फार्मर साइंटिस्ट।

धर्मवीर ने बचपन में मां सावित्री देवी को जड़ी-बूटियों को उगाते हुए देखा था और इनके मन इसके प्रति में चाह थी। बड़े हुए तो गरीबी ने इस ओर सोचने का मौका नहीं दिया। वह 1987 में दिल्‍ली रोजी-रोटी के लिए आ गए और वहां खारी बावली में रिक्‍शा चलाने लगे।

इसी दौरान जड़ी बूटियों की मंडी में जाने लगे, तो मां की जड़ी-बूटी की खेती याद आई। यह चाह बढ़ी तो वर्ष 1993 में वह अपने गांव लौट आए और उत्तराखंड के हल्द्वानी से 80 अलग-अलग जड़ी बूटियों के बीज लेकर आए। इनमें से कुछ ही कामयाब हुई। खुद की जमीन केवल दो एकड़ है, लेकिन ठेके पर जमीन लेकर 1996 में एलोवेरा व स्टीविया की खेती करनी शुरू कर दी।

इसके बाद तो उनकी जिंदगी बदल गई और ऐसी उपलब्धियां हा‍सिल कीं कि उनको दो बार राष्ट्रपति ने सम्मानित किया। वर्ष 2012 में तत्कालीन केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने उनको फार्मर साइंटिस्ट के अवार्ड से सम्मानित कर चुके हैं। उनके द्वारा तैयार की गई मल्टी पपर्ज फूड प्रोसेसिंग मशीन पर विदेश भी कायल हैं। कीनिया व जिम्बाबे में कई मशीनें जा चुकी है।

एलोवेरा से एलोवेरा जूस, एलोवेरा जैल व शैंपू तैयार करने के लिए उन्होंने गांव में मशीन स्थापित की हुई है। मल्टीपपर्स मशीन बनाने का आइडिया भी उनका स्वयं का ही होता है। इंजीनियरों के सहयोग से वह इन मशीनों को बनाते हैं। स्वयं उत्पाद तैयार करने के लिए तो वह इन मशीनों का प्रयोग करते ही हैं साथ ही इसे बेचते भी हैं।  इन मशीनों की विदेशी भी कायल हैं। धर्मवीर ने मोबाइल सिंचाई मशीन बनाई।

उनके द्वारा निर्मित इस मशीन की तत्‍कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने सरहाना की। मशीन को राष्ट्रपति भवन में प्रदर्शित किया। यहां राष्ट्रपति ने परिवार के साथ उनके द्वारा बनाई गईं मशीनें देखीं और इनकी सराहना की। उनके द्वारा बनाई गई हाथ से खींचने वाले सिंचाई सिस्टम तथा ट्रैक्टर से चलाई जाने वाली सिंचाई सिस्टम की प्रशंसा करते हुए इसका नामकरण रेन टैंकर दिया।

सिंचाई सिस्टम में छह हजार लीटर पानी की क्षमता वाला टैंकर लगाया गया है। इसे ट्रैक्टर की सहायता से खींच कर खेतों में ले जाकर फ सलों की सिंचाई की जा सकती है। टैंकर के बिल्कुल पीछे चैसी पर एक पांच हार्स पॉवर का ईंजन लगाया गया है। इसकी सहायता से लगभग 150 फीट के दायरे में बरसात की जा सकती है।

अब, धर्मवीर कांबोज ने सोलर बैटरी से चलने वाली झाड़ू मशीन तैयार की है, हालांकि उन्होंने 25 वर्ष पहले मशीन का डेमो मॉडल तैयार किया था, लेकिन गरीबी की वजह से मशीन को पूरा नहीं कर पाए थे। धर्मबीर ने बताया कि इस मशीन का निर्माण करने में घरेलू सामान का प्रयोग किया गया है।

 

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