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क्या आपको पता है, डायबीटीज बन सकता है अंधेपन का कारण

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Yuva Haryana
22-03-2018

डायबीटीज की वजह से शरीर के कई अंग प्रभावित होते हैं, जिसमें आंखें भी शामिल हैं। अगर सही समय पर इसका इलाज नहीं किया जाए, तो रोगी अंधेपन का शिकार भी हो सकता है। डायबीटीज के कारण रेटिना को रक्त पहुंचाने वाली महीन नलिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, जिससे रेटिना पर वस्तुओं का चित्र सही से या बिल्कुल भी नहीं बन पाता है।

इसी समस्या को डायबीटिक रेटिनोपैथी कहते हैं। इसका खतरा 20 से 70 वर्ष के लोगों को ज्यादा होता है। शुरूआत में इस बीमारी का पता नहीं चलता। जब आंखें इस बीमारी से 40 फीसदी तक डैमेज हो जाती हैं, उसके बाद इसका प्रभाव दिखने लगता है। डायबीटीज जितने लंबे समय तक रहता है, डायबीटिक रेटिनोपैथी की संभावना भी उतनी ही बढ़ जाती है।

लेजर तकनीक से इलाज के बाद अंधेपन को 60 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। डायबीटीज की वजह से शरीर का इंसुलिन प्रभावित हो जाता है। यही इंसुलिन ग्लूकोज को शरीर में पहुंचाता है। जब इंसुलिन नहीं बन पाता या कम बनता है, तो ग्लूकोज कोशिकाओं में नहीं जा पाता और खून में घुलता रहता है। इसी कारण खून में शुगर का लेवल बढ़ता जाता है।

यही खून शरीर के सभी हिस्सों तक पहुंचता है। हाई शुगर के साथ रक्त जब लगातार फ्लो करता है, तो इससे रक्त नलिकाएं क्षतिग्रस्त हो सकती हैं।

बीमारी के लक्षण

– चश्मे का नंबर बार-बार बढ़ना
– सुबह उठने के बाद कम दिखाई देना
– सफेद या काला मोतियाबिंद
– आंखों में खून की नसें दिखना
– रेटिना से खून आना
– सिर में दर्द रहना
– अचानक आंखों की रोशनी कम हो जाना

सुरक्षा के उपाय

– डायबीटीज का पता चलते ही ब्लड शुगर और कलेस्ट्रॉल की मात्रा को कंट्रोल करें।
– सामान्य लोगों को साल में एक-दो बार आंखों की जांच करवानी चाहिए।
– जिन्हें 8-10 साल से डायबीटीज है, उन्हें हर 3 महीने में आंखों की जांच करवानी चाहिए।
– अगर आपको आखों में दर्द, अंधेरा छाने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।

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