सुविधाओं के अभाव में दम तोड़ रही खेल नर्सरियां, बीजेपी के खेल प्रयास नहीं उतरे खरे

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Yuva Haryana

15 Nov, 2019

प्रदेश में खेल नर्सरियों को लेकर बीजेपी सरकार के प्रयास खरे नहीं उतर रहे हैं। अब तक 11 जिलों में अलॉट हुई 225 खेल नर्सरियों में से 84 बंद हो चुकी हैं। दरअसल, इन्हें शुरू करते समय विभाग ने यहां उपलब्ध संसाधनों को नहीं जांचा। अलॉटमेंट के बाद जब विभाग ने ग्राउंड रिपोर्ट तैयार की तो पता चला कि बड़ी खामियां हैं। इन नर्सरियों को नोटिस देकर बंद करने के आदेश जारी कर दिए गए।

गौरतलब है कि प्रदेश सरकार ने स्वर्ण जयंती पर सभी जिलों में 20-20 खेल नर्सरियां खोलने की घोषणा की थीं। ये 440 खेल नर्सरियां शिक्षण संस्थानों में अलॉट कर दी गईं। वर्ष 2018-19 में खेल विभाग ने जल्दबाजी दिखाते हुए खेल नर्सरियों का उद्घाटन कर दिया, लेकिन कई जगह कोच नहीं मिले, जहां थे उनकी सैलरी समय पर नहीं मिल पाई। बच्चों की हाजिरी में फर्जीवाड़ा पकड़ा गया। प्रदेश के 11 जिलों में 225 खेल नर्सरियों में 84 बंद हो चुकी हैं। सर्वाधिक खेल नर्सरी रोहतक में 45 में से 34 बंद हो चुकी हैं।

डीएसओ सुखबीर सिंह का कहना है कि उनके जिले में स्कूल संचालकों ने कोच को मानदेय समय पर नहीं दिया और कोच खेल नर्सरी छोड़कर चले गए।

खेल नर्सरियों के बंद होने की 3 बड़ी वजह

बजट की कमी, खेल उपकरण नहीं

गोल्डन जुबली खेल नर्सरी जहां शुरू की जानी थी, वहां पर खेल मैदानों के रखरखाव, खेल उपकरणों की खरीद और खेल से संबंधित आवश्यकता के लिए 1 लाख रुपए दिए जाने तय हुए थे। इसके लिए हर जिले में कमेटी बनाई गई थी। अभी तक पूरा सामान नहीं पहुंच पाया है। बजट न होना सबसे बड़ा कारण है।

समय पर नहीं भेजी गई हाजिरी

ज्यादातर शिक्षण संस्थानों की ओर से जिला खेल विभाग के कार्यालय में समय पर खिलाड़ियों की हाजिरी नहीं भेजी गई। शिक्षण संस्था और प्रशिक्षण देने वाले में आपसी मतभेद के कारण कई नर्सरियों को बंद करना पड़ा। इसका सीधा असर वहां प्रेक्टिस कर रहे खिलाड़ियों पर पड़ा।

‌25 हजार में प्रशिक्षण देने को राजी नहीं कोच

 

खेल नर्सरियों में कोचों की नियुक्ति खेल संबंधित नहीं की गई। यह नियुक्ति शिक्षण संस्थानों ने की थी। कोच किसी और खेल थे और खिलाड़ी दूसरे खेलों के। इस वजह से खिलाड़ियों को प्रैक्टिस करने में बड़ी दिक्कत हुई, कई खिलाड़ी नर्सरी छोड़कर चले गए। अधिकारियों का तर्क है कि खेल प्रशिक्षक पंजाब, उत्तरांचल व हिमाचल से आए। वे 25 हजार रुपए मानदेय में प्रशिक्षण देने को राजी नहीं हो रहे।

डिप्टी डायरेक्टर बोले- प्रदेश में खेल नर्सरी बंद होने की उन्हें जानकारी नहीं

प्रदेश के सभी जिलों में धीरे-धीरे बंद होती जा रही खेल नर्सरी के मुद्दे पर खेल विभाग के डिप्टी डायरेक्टर सत्यदेव मलिक से बात की गई तो उन्होंने दो टूक शब्दों में जवाब दिया कि प्रदेश में खेल नर्सरी क्यों बंद हो रही है। इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। खेल नर्सरी की जिम्मेदारी उनकी नहीं है। ये हालात तब हैं जब वो सितंबर माह में रोहतक जिले में खेल नर्सरी बंद होने के मुद्दे पर स्कूल संचालकों और डीएसओ की मौजूदगी में मीटिंग कर लंबी चर्चा की थी और अब वो जानकारी होने से इंकार कर रहे हैं।

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