मेवात में महामारी का खतरा, 200 से ज्यादा तालाब सूखे, पानी के लिए हाहाकार

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Younus Alvi, Yuva Haryana
Mewat, 21 May, 2018

मेवात इलाके में बरसात की कमी और प्रशासन द्वारा तालाबों को भरने का कोई इंतजाम ना किए जाने की वजह से मेवात में करीब 200 तालाब सूख चुके हैं। जनसंख्या की हिसाब से मेवात के सबसे बड़े गांव अकेले साकरस में आठ तालाब काफी समय से सूखे हुऐ हैं। इनता ही नहीं विधायक, मंत्री और चेयरमैनों के गावों के तालाब भी सूखे हुऐ हैं। तालाबों के सूख जाने की वजह से पशुओं को पीने के पानी की भारी किल्लत हो गई हैं। जंगली जानवरों को भी पानी के बगैर इधर उधर भटना पड़ रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार नूंह जिला के गांव लाहाबास, कुलढेहरा, सलंबा, बीसरू, भादस, करहेडी, अकलीमपुर, बदरपुर, गंगवानी, खेडली खुर्द, जलालपुर, सिसौना, नाईनंगला, राजाका, रेहना, फिरोजपुर नमक, खेडीकंकर, मढी, गंडूरी, हसनपुर सहित करीब सैंकडों गावों के करीब 200 से अधिक तालाब सूख चुके है। इसके अलावा मेवात के सबसे बडे गांव साकरस में वर्षो से आठ जोहड़ सूखे पड़े हैं।

वहीं हरियाणा वक्फ बोर्ड के चेयरमैन व राज्य मंत्री रहीस खान व पूर्व डिप्टी स्पीकर आजाद मोहम्मद का पैतृक गांव नीमखेड़ा दो तालाब पांच साल से सूखे, विधायक नसीम अहमद के पैतृक गांव तिगांव, इनेलो विधायक जाकिर हुसैन का पैतृक गांव रेहना, पूर्व मंत्री मोहम्मद इलयास की ससुराल कंकरखेडी, मेवात विकास अभिकरण के चेयरमैन खुरशीद राजाका के गांव राजाका में भी काफी समय से तालाब सूखे पड़े हैं।

वर्षा की कमी और जमीनी वाटर लेवल सैंकड़ों फीट गहरा चला जाने से इन तलाबों को गांव वाले भरने में अस्मर्थ हैं और प्रसाशन ने इनको भरने का कोई इंतजाम नहीं किया हैं। अधिकतर गांवों के तालाब बरसात होने पर भरते हैं।

गांव मढी निवासी खालिद हुसैन का कहना है कि उनके गांव सहित 15 गांवों के तालाबों को भरने के लिए सरकार ने वर्ष 1993 में गांव आकेडा से मंढी तक एक नाला मंजूर किया था। जिसपर लाखों रूपये भी खर्च हो चुके हैं और यह नाला अभीतक अधूरा पड़ा हुआ है। उन्होने बताया कि गांव सिकंदरपुर में कुड बनाकर वहां से लिफ्टिंग कर पानी आगे पहुंचाया जाता लेकिन वह कुंड भी अधूरा पड़ा है।

लोगों का कहना है कि तालाबों में पानी ना होने की वजह से ग्राम पंचायतों को भी भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। अगर इन तालाबों को भरने का इंतजाम कर दिया जाऐ तो एक तालाब 10 से 30 लाख रूपये के पट्टे भी छूट सकते हैं जिससे गावों को काफी फायदा होगा वहीं पशुओं को भी पानी के लिए तरसना नहीं पड़ेगा।

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