चुनाव की कहानी, 90 और 111 साल के बुजुर्गों की जुबानी

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Yuva Haryana,

Karnal, 16 March,2019

देश में हर पांच साल बाद चुनाव होते है, हर पांच साल बाद जनता वोट डालती है, इस उम्मीद से की जिस नेता को वह वोट डाल रहे है, वह उनकी उम्मीदों पर खड़ा उतरेगा। उनके देश शहर गाँव का विकास करेग, लेकिन होता इससे उल्ट ही है।

लोकतंत्र में वैसे तो हर किसी का मत कीमती है एक वोट किसी भी नेता की किस्मत का फैसला कर सकता है वह जीतेगा या हारेगा ये लोगो का मत वोट तैय करता है। करनाल के दर्जनों लोग ऐसे है जिनकी उम्र 90 और 100 से पार है। उम्र इतनी हो चुकी है फिर भी आज तंदरुस्त है और 12 मई को होने वाले लोकसभा चुनाव में वोट डालने को तैयार है।

उन्हीं में से दो ऐसे शख्श जिन्होंने कई नेता देखे, भारत- पस्किस्तान के बंटवारे का दौर देखा, रैलियों में आने वाले बड़े-बड़े नेताओ से मिले, हर किसी के वादों को सुना लेकिन कोई भी जनता की उम्मीदों पर खड़ा नही उतरा। आज भले ही इनकी उम्र ढल रही है चुनावी ज्ञान दोनों के पास भरपूर है।

एक की उम्र 90 साल है, तो दुसरे की 111 साल है। हर पांच साल बाद चुनाव में वोट डालते है। इस उम्मीद से की शायद कोई नेता ऐसा होगा जो जनता के विकास के बारे में सोचेगा, लेकिन शायद ही किसी ने जनता की ओर गौर किया होगा।

गाँव उचानी के राजाराम उम्र में 111 साल के है लेकिन लगता नही उम्र में वह इतने बड़े है। साधा खाना हुक्का गुदगुडाना अपने सारे काम खुद करना कस्सी चलाना गाँव के चक्कर लगाना यह इनका रोज का काम है। करीब 50 साल तक अपने गाँव के पंचायत सदस्य रह चुके राजा राम कहते है की चुनावो के समय पर नेता हर बार वादे करने आते है, लेकिन कुर्सी मिलने के बाद सब भूल जाते है। राजाराम का कहना है की उसने इंद्रा गांधी, राजीव गांधी, सुषमा स्वराज, भजनलाल, देवीलाल, चौटाला, भूपिंदर हुड्डा से लेकर नरेद्र मोदी तक के समय को देखा है।

राजाराम हर पांच साल बाद चुनाव में अपने परिवार वालो के साथ वोट डालते है और लोगो को जागरूक करते हैं, वोट जरुर डाले, क्यूंकि यह हमारा हक है। भले ही नेता लोग सत्ता की कुर्सी मिलने के बाद जनता को भूल जाते है लेकिन उसके बावजूद भी राजा राम 111 साल की उम्र में आज भी वोट डालते हैं।

वहीं गाँव काछवा के चरण सिंह उम्र में 90 साल है, लेकिन कहने को किसी जवान से कम नही। सादा खान-पान, रेडियो सुनना और खुद चलकर खेतों में जाना, यह इनका रोज का काम है। चरण सिंह पाकिस्तान के सुल्तान पुर में रहते थे। भारत-पाकिस्तान के बंटवारे से पहले के नेताओं से लेकर आज 2019 के सभी नेताओ से वह खूब वाकिफ हैं। भारत पाकिस्तान के वक्त वह अपने परिवार के साथ करनाल के गाँव काछवा में आकर बसे थे।

चरण सिंह का कहना है की 90 साल की उम्र मेरी हो चुकी है, हर पांच साल बाद हर चुनाव में वोट डालता हुं, इस उम्मीद से कोई नेता ऐसा होगा जो देश के विकास और बच्चो के रोजगार के बारे में कुछ करेगा, लेकिन हर कोई अपना पेट भरकर चला जाता है। इस बार भी चुनाव में वोट डालुंगा और सभी को कहता हुं, वोट डाले क्यूंकि वोट हमारी ताकत और उस नेता को डालें जिस पर आपको भरोसा है।

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