कर्मचारी संघ ने पूर्व सीएम हुड्डा से की मुलाकात, एक दिन का विशेष सत्र बुलाने की मांग

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Sahab Ram, Yuva Haryana

Chandigarh, 24 June, 2018

हरियाणा सरकार के ढुल-मुल रवैये ने आज हमारे समय पक्के हुए कर्मचारियों तक के भविष्य पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। इस सरकार ने लगभग एक लाख अनुबंध पर लगे कर्मियों को पक्का करने की दिशा में कदम उठाना तो दूर, उलटे अदालत में पैरवी में ढिलाई कर हमारे समय पक्के हुए 4654 कर्मचारियों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ किया है। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रतिनिधिमंडल को सम्बोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने यह बात कही। इस सम्बन्ध में पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को एक पत्र लिखकर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर हाई कोर्ट निर्णय से प्रभावित कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित करने की दिशा में सभी आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।

सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रतिनिधिमंडल को मुलाक़ात करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सरकार से अध्यादेश लाकर हाई कोर्ट के निर्णय से प्रभावित कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित करने की मांग की। उन्होने सरकार से विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर हाई कोर्ट के निर्णय के क्रियान्वयन पर रोक लगाने का बिल पारित करने के मांग भी सरकार से की है । उन्होने कहा कि कांग्रेस पार्टी दोनो मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने का काम करेंगी । उन्होने कहा कि अगर मनोहर लाल सरकार प्रदेश के लाखों कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा को लेकर विधानसभा में बिल लायेंगी तो कांग्रेस पार्टी न केवल उसका पूर्ण समर्थन करेगी, बल्कि इसका श्रेय भी सरकार को देने में नही हिचकिचायेंगी । उन्होने कर्मचारियों को आश्वासन दिया की इस मामले में वह  सरकार को पत्र लिखते हुये पुरा दबाव बनाया जायेगा और मामले को कांग्रेस पार्टी विधानसभा में जोरदार तरीके उठायेंगी। शाम को उन्होंने पत्र लिखकर मुख्यमंत्री को भेज भी दिया।

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि यह मामला केवल लाखों कर्मचारियों की नौकरी से बाहर होने का ही नही है बल्कि यह प्रदेश की जनता से जुड़ा हुआ मुद्दा  है, क्योंकि अगर विभिन्न विभागों में काम कर रहे लाखों कर्मचारी 6 महीने में नौकरी से बाहर होंगे तो सभी विभागों का काम काज ठप्प हो जाएगा, जिसका खामियाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ेगा। क्योंकि हाई कोर्ट के निर्देशानुसार खाली पड़े लाखों पदों को 6 महीने में नियमित भर्ती से नही भर सकती है । उन्होने कर्मचारियों की अन्य मांगों व 28 जून के जेल भरो आन्दोलन का पुरजोर समर्थन किया। उनके आवास पर पहुंचे सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के सामूहिक  प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सकसं के महासचिव सुभाष लाम्बा, वरिष्ठ उप प्रधान नरेश कुमार शास्त्री, उप प्रधान सबिता, सुरेश नौहरा, सचिव राजेन्द्र जुलाना, प्रवीण देसवाल, ऊषा दहियां, रोहताश नैन, रविंद्र सीमा चोधरी श्रवण कुमार व महेन्द्र बोहत आदि कर रहे थे । प्रतिनिधिमंडल में हाई कोर्ट के निर्णय से प्रभावित सभी विभागों के सैकड़ों कर्मचारियों के प्रतिनिधि शामिल थे ।

महासचिव सुभाष लाम्बा ने बताया कि हाईकोर्ट  के निर्णय आए हुए 22 दिन बीत चुके हैं, लेकिन सरकार की तरफ से अभी तक इस निर्णय पर रोक लगाने के लिए कोई ठोस कार्यवाही अमल में नहीं लाई गई है, जिसके कारण कर्मचारियों मे भारी बेचैनी बढ़ रही है। उल्लेखनीय है कि पंजाब एण्ड हरियाणा हाईकोर्ट ने 31 मई को दिए अपने निर्णय में 2014 में रेगूलाईजेशन की अधिसूचित सभी नीतियों को रद्द करते हुए 6 माह के अंदर रिक्त पड़े पदों को पक्की भर्ती से भरने और अनुबंध आधार पर लगे कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने का आदेश दिया था। इस निर्णय के कारण एक ओर जहां, इन नीतियों के तहत नियमित हुए 4654 कर्मचारी अनियमित होंगे, वहीं दूसरी तरफ सभी विभागों में अनुबंध आधार पर लगे कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त हो सकती हैं।

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