दिल्ली की तर्ज पर चला हरियाणा का शिक्षा विभाग, बच्चों को फर्राटेदार हिंदी और अंग्रेजी बुलवाने का रखा लक्ष्य

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Sahab Ram, Yuva Haryana
Chandigarh, 05 July, 2018
हरियाणा सरकार ने प्रदेश में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए इस वर्ष बच्चों को हिन्दी और अंग्रेजी भाषा का संपूर्ण ज्ञान देने के लिए रिडिंग गारंटी प्रोग्राम, 238 स्कूलों को बैग फ्री अंग्रेजी मीडियम बनाना, 6 इंगलिश लैंग्वेज लैब बनाना, 9वीं कक्षा से ही इंग्लिश मीडियम में गणित व साईंस विषय पढ़ाना शुरू करना, अटल टिंकरिंग लेबोरटरी की स्थापना करना, स्टूडैंट असैसमैंट टैस्ट हर 2 महीने  में करना और इसके अतिरिक्त अध्यापकों को विशिष्ठ विषयों में और विशेष रूप से विक्लांगों बच्चों को शिक्षा देने के लिए भी ट्रेनिंग देने पर जोर दिया जा रहा है।
स्कूल शिक्षा विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव धीरा खंडेलवाल ने चंडीगढ़ में बताया कि वर्ष 2017-18 से राज्य के 180 स्कूलों में पहली व दूसरी कक्षा को बैग फ्री अंग्रेजी मीडियम बनाया गया है। इस वर्ष 238 और स्कूलों को बैग फ्री बनाया जा रहा है, जिससे सरकारी स्कूल के बच्चे भी अंग्रेजी भाषा में पारंगत बन सकेंगे।

कुछ मॉडल संस्कृति स्कूलों में 6 इंगलिश लैंगवेज लैब स्थापित की गई हैं। विद्यार्थियों को डिजीटल लर्निंग सीखने में सहायता करने व उनकी सुनने व बोलने की स्किल को सुधारने में इन लैब से सहायता मिलेगी। जल्द ही अन्य स्कूलों में भी इस प्रकार की लैब स्थापित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि करीब हर कक्षा के लिए अंगेजी के करीब 200 वाक्य तैयार किये गए हैं, ताकि 5वीं कक्षा तक बच्चे लगभग 1 हजार वाक्य अंग्रेजी के सीख चुके होंगे।
बच्चों को प्रकृति से जोडऩे और उन्हें उसके प्रति संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से हरियाणा सरकार द्वारा एक नया कदम उठाया गया है जिसके तहत छठी कक्षा से 12 वीं कक्षा तक के विद्यार्थी अपने घर, घर के आस-पास या किसी सार्वजनिक स्थान पर एक पौधा लगाएंगे।
इस वर्ष से सुपर-100 प्रोग्राम के तहत सरकारी स्कूलों के साईंस स्ट्रीम के 11वीं  तथा 12वीं कक्षा के प्रतिभावान विद्यार्थियों, जिन्होंने 10वीं कक्षा में 85 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए हैं,  उन्हें विकल्प फाऊंडेशन दो साल कोचिंग देगा, जिससे आईआईटी, जेईई, नीट जैसी प्रतियोगिता परीक्षाओं के लिए बच्चे पूर्ण रूप से तैयार होंगे। इसका खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य मेधावी छात्रों को प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करना है। विभाग द्वारा 225 विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा।  एलन, लक्ष्य, एसीई आदि संस्थानों ने भी स्कूल शिक्षा विभाग को सहयोगी बनने के संपर्क किया है।
बच्चों में साईंस के प्रति और अधिक रूचि पैदा करने के लिए राज्य के 310 सरकारी स्कूलों में 9वीं कक्षा से ही इंगलिश मीडियम में गणित व साईंस विषय पढ़ाना शुरू किया है। एलन संस्थान ने इसमें अध्यापकों को ओरियंटेशन उपलब्ध करवाने में रूचि दिखाई है। साईंस प्रोग्राम को प्रोत्साहन देने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने राज्य के सरकारी सैकेंडरी व सीनियर सैकेंडरी स्कूलों में पिछले दो सालों में 2300 साईंस किट वितरित की हैं।

इसके साथ ही 8000 किट मिडल स्कूलों में भेजी गई हैं। गणित विषय को प्रोत्साहन देने के लिए प्राथमिक स्कूलों में मैथेमैटिक्स किट भी दी जा रही हैं। इसके साथ ही स्कूलों में मैथ-लैब, मैथ कॉर्नर व गणित-ज्ञान क्लब स्थापित किए जाएंगे।
स्कूल शिक्षा विभाग ने वर्ष 2017-18 से क्वीज-क्लब बनाए हैं। पाठ्य-पुस्तकों के आधार पर कक्षा व विषय के अनुसार प्रश्न-बैंक तैयार किए गए हैं। यह विभाग की वैबसाईट पर भी उपलब्ध है। स्कूल लेवल से लेकर स्टेट लेवल तक क्वीज-कंपीटिशन  करवाए जा रहे हैं।
हर ब्लॉक में 20 कलरफुल झुले स्कूलों में लगाए जाएंगे, ताकि बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ खेल का भी आनंद लें। इससे स्कूलों में खुशनुमा माहौल बनेगा। इसके साथ ही ओपन ऐयर जिम के उपकरण भी लगाए जाएंगे।

बड़े विद्यालयों में हैरिटेज कॉरनर स्थापित किये जाएंगे, ताकि बच्चे प्रगति के साथ-साथ अपने इतिहास से जुड़े रहें। लर्निंग आउटकम के दृष्टिगत स्टूडैंट असैसमैंट टैस्ट अब हर 2 महीने में लिया जाएगा। प्रथम कक्षा से लेकर 12 वीं कक्षा तक यह टैस्ट लिया जाता है। बोर्ड कक्षाओं के लिए परि-बोर्ड परीक्षा भी ली जाती है। रिपोर्ट कार्ड अच्छे डिजाइन किए हुए स्कूलों में दिए जाते हैं।
वर्ष 2012-13 में राज्य के 8 जिलों के 40 स्कूलों एन.एस.क्यू.एफ का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया जिसमें रिटेल, सिक्योरिटी, आटोमोबाइल व आई.टी स्किल सिखाई गई। अब राज्य के 1001 स्कूलों में 14 स्किल सिखाई जा रही हैं जिससे 1,07,182 विद्यार्थियों को लाभ हुआ है। उन्होंने कहा कि विकलांग बच्चे जो स्कूलों में नहीं आ सकते, उनके लिए होम बेस शिक्षा भी शुरू की गई है। अध्यापक ऐसे बच्चों के घर जाकर उन्हें शिक्षित कर रहे हैं।
इस वर्ष से जिलों में करियर काउंसलिंग एवं कन्फलिक्ट मैनेजमेंट सैल स्थापित किया जाएगा। इसमें बच्चों को करियर से संबंधित सलाह दी जाएगी और बच्चों के अंतरमन में ईष्या, क्रोध जैसी भावनाएं पैदा न हो, इसके लिए बच्चों की समय-समय पर काउंसलिंग की जाएगी। इस सैल में अध्यापक, बच्चों के अभिभाव और बच्चे कभी भी जाकर किसी भी विषय पर बात कर सकेंगे।

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