जाट आंदोलन में दर्ज केस वापिस नहीं ले पाएगी प्रदेश सरकार, कोर्ट ने दिया झटका

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Gourav Sagwal, Yuva Haryana

Panchkula

जाट आरक्षण में दर्ज 407 एफआईआर वापस लेने की हरियाणा सरकार की तैयारी पर हाईकोर्ट ने झटका दे दिया है। हरियाणा की सरकार इसे मामूली मामलों में दर्ज FIR मानते हुए इन्हें वापस लेने की तैयारी में थी, लेकिन एमिकस क्यूरी ने बताया कि प्रकाश सिंह ने इनमें से 129 मामलों को गंभीर माना है। इसके बाद हाईकोर्ट में सरकार को सफाई कहना पड़ा कि अगली सुनवाई तक इन्हें वापस लेने की प्रक्रिया शुरू नहीं की जाएगी।

एमिकस क्यूरी ने जाट आंदोलन पर सरकार की नाकामी करार दिया। सीनियर एडवोकेट अनुपम गुप्ता ने कोर्ट में कहा कि FIR वापस लेने का फैसला सरकार का शांति के लिए नहीं बल्कि राजनीतिक हित साधने के लिए था।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने जाट नेताओं से इसको लेकर मुलाकात की तो अमित शाह की रैली के पहले भी जाटों को शांत करने के लिए बातचीत हुई थी। इसी के चलते पिछले साल जून में 137 और इस महीने में 270 मामलों को वापस लेने का फैसला लिया गया।

वहीं सरकार ने गुप्ता की दलीलों पर बचाव की मुद्रा में आते हुए कहा कि जो केस वापस लेने का फैसला लिया गया है उसे ट्रायल कोर्ट के सामने रखा जाएगा और उन्हीं की मंजूरी से केस वापस होंगे। लेकिन इस पर गुप्ता ने कहा कि कोई भी पब्लिक प्रोसिक्यूटर सरकार की राय से अलग नहीं हो सकता। ऐसे में उसे मंजूरी देनी ही पड़ेगी

गुप्ता ने कहा कि आंदोलन के दौरान 2105 मामले दर्ज किए गए थे और इनमें से 407 मामले वापस लिए जा रहे हैं। यह कुल दर्ज मामलों का 20 प्रतिशत है। लेकिन जिन 407 मामलों को मामूली बताकर सरकार वापिस ले रही है, प्रकाश सिंह ने उनमें से 129 को गंभीर माना था। ऐसे में हरियाणा सरकार इस मामले को लेकर सीधे तौर पर घिर गई है।

बता दें कि सरकार झज्जर में दर्ज 172 मामलों में से 82 को वापस लेने की तैयारी थी और प्रकाश सिंह की रिपोर्ट में इनमें से 53 को गंभीर माना। वहीं हिसार में 155 मामलों में से 63 को वापस लेना था जिनमें से 38 मामले गंभीर थे। जींद में दर्ज 65 मामलों में से 39 को वापस लेने की तैयारी की थी इनमें से 6 गंभीर थे। रोहतक में दर्ज 1212 मामलों में से 35 को वापस लेने की तैयारी की थी और इनमें से 21 गंभीर थे।

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