पर्यावरण कोर्ट के जज जो देते है पेड़ काटने की ऐसी सजा

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Kurukshetra

जंगल से पेड़ काटने की सजा एक शख्स को ऐसी सजा दी की वह दिन रात सेवा में लगा रहा। यमुनानगर के कलेसर जंगल में पेड़ काटने वाले  अब्दुल के खिलाफ वन विभाग ने केस दर्ज किया था। पर्यावरण अदालत ने अब्दुल को सजा और जमानत की शर्त पर पेड़ के बदले पेड़ लगाने का काम दिया।

अब्दुल को कोर्ट ने 51 पोधे लगाने को कहा और साथ ही 6 महीने तक उन पेड़ पोधो की देख-रेख करने को कहा। ठीक ऐसे ही अम्बाला में स्क्रीनिंग फैक्टरी संचालक रामसिंह वायु प्रदूषण फैलाने के दोषी पाए गए थे, उन्हें भी 51 पौधे लगाने पड़े।

कुरुक्षेत्र की विशेष पर्यावरण अदालत के पीठासीन अधिकारी अनिल कौशिक ऐसी सजाओं के लिए ही जाने जाते है। वे दो साल में 210 मामलों में ऐसी अनूठी सजा दे चुके हैं।

फॉरेस्ट और वाइल्ड लाइफ एक्ट में जुर्माने या कैद की सजा का प्रावधान है, लेकिन जज साहब पर्यावरण की कीमत का अहसास कराने के लिए अपराधियों को पौधे लगाकर उनकी सेवा करने की सजा दे रहे हैं।

बता दें कि हरियाणा के कुरुक्षेत्र व फरीदाबाद में पर्यावरण कोर्ट हैं। कुरुक्षेत्र कोर्ट के अधीन 15 जिले हैं। यहां पर वन, वन्य जीव और प्रदूषण से जुड़े केसों की सुनवाई की जाती हैं।

दो साल पहले विशेष पीठासीन अधिकारी ने वन अधिनियम में एक दोषी को हर्जाने के साथ ही पौधे लगाने की सजा दी थी। लेकिन इस सजा के बाद 6 महीने उनकी देख-रेख की सजा और इसमें जोड़ दी गई।

 

 

खास बात ये है कि जनवरी 2017 से फरवरी 2018 तक अदालत 130 मामलों में फैसला सुनाते हुए 42,718 पौधे लगवा चुकी है। जबकि जमानत के मामलों में 8,500 पौधे लगे हैं। वन अधिनियम में टहनी से लेकर पेड़ काटने पर अधिकतम एक साल की सजा होती है। अधिकांश मामलों में आरोपी से वन विभाग हर्जाना भरवाता है। हर्जाना न देने पर केस कोर्ट जाता है।

 

वहीं 4जी की केबल बिछाते समय काटे गए पौधो के हर्जाने के तौर पर जज साहब 20 लाख रू और 9000 पौधे लगवा चुके है।

 

 

 

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