Home Breaking यमुना ने नहीं बल्कि अधिकारियों और प्रॉपर्टी डीलरों की सांठगांठ ने डुबोया मकानों को पानी में !

यमुना ने नहीं बल्कि अधिकारियों और प्रॉपर्टी डीलरों की सांठगांठ ने डुबोया मकानों को पानी में !

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Dinesh Kumar, Yuva Haryana

Faridabad, 23 August 2019 

फरीदाबाद के बसंतपुर इलाके में यमुना की बाढ़ ने नहीं, अधिकारियों और प्रॉपर्टी डीलरों की सांठगांठ ने 4 हजार घरों को पानी में डूबों दिया। यह हम नहीं कह रहे हैं, इस बात कि तस्दीक यह चिट्ठी कर रही है, जिसमें साफ तौर से यमुना क्षेत्र में हुए अवैध निर्माणों को रोकने के लिए जिला नगर योजनाकार को जिला उपायुक्त की तरफ से लिखा गया।

 

इस लैटर में उपायुक्त की तरफ से 10 अप्रैल 2017 को डीटीपी को यमुना से लगते अवैध निर्माणों को 7 दिन के अंदर हटाने और उनके कार्यालय में रिपोर्ट करने के लिए कहा गया था। इतना ही नहीं जिला उपायुक्त ने इस लैटर को इंपॉर्टेंट मैटर बताकर कार्रवाई करने को कहा गया था। लेकिन डीटीपी की तरफ से कोई कार्यवाही नहीं हुई।

इतना ही नहीं सिंचाई विभाग के EXN ने भी इसी साल 16 अगस्त को भी जिला उपायुक्त द्वारा लिखे गए 2017 के लेटर का हवाला देते हुए। इस पर बाकायदा मोस्ट अर्जेंट लिखकर कार्रवाई करने को लेकर कहा, लेकिन तटीय क्षेत्र हो रहे इन अवैध निर्माणों पर डीटीपी की तरफ से कोई भी कार्रवाई नहीं की गई।

वो लैटर, जिसमें साफतौर पर लिखा है, कि जरूरी कार्रवाई की जाए। वहीं यहां रह रहे लोगों का कहना है कि उन्हें प्रॉपर्टी डीलरों द्वारा लूटा गया। यमुना के साथ बांध बनाने तक के वादे किए गए। अब जिस तरह से यमुना में पानी आने के बाद फरीदाबाद के बसंतपुर इलाके में करीब 4 हजार मकान बाढ़ की चपेट में आए। उसे देखकर तो यही लगता है कि यमुना के पानी ने नहीं उन्हें प्रॉपर्टी डीलर और अधिकारियों की सांठगांठ ने डुबोया है।

जिला उपायुक्त द्वारा लिखे गए इंर्पोटेंट लेटर को भी किस तरह से डीटीपी द्वारा नजरअंदाज किया गया। यह उसका एक नमूना है। यमुना से लगते क्षेत्र में रह रहे लोगों का कहना है कि उन्हें बड़े-बड़े सब्जबाग दिखाए गए। जिला प्रशासन की तरफ से कोई रोकथाम नहीं की गई और प्रॉपर्टी डीलर लोगों को झांसे में लेकर जमीन बेचते रहे। जिसका खामियाजा अब हर साल इसी तरह से उठा रहे हैं।

वहीं इस मामले में क्षेत्र के विधायक ललित नागर का कहना है कि प्रॉपर्टी डीलरों ने लोगों को धोखे से जमीन बेची और लोगों ने मजबूरी में अन्य जगह पर महंगी जमीन होने के चलते यहां सस्ते दामों पर जमीन खरीद कर मकान बना लिए। इस बात को लेकर उन्होंने भी अधिकारियों से कार्यवाही करने के लिए कहा था लेकिन किसी ने नहीं सुना।

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