सरकार के इस फैसले के विरोध में उतरे किसान

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Yuva Haryana

22 oct, 2019

केंद्र सरकार की ओर से क्षेत्रिय व्यापक, आर्थिक भागेदारी (आरसीईपी) को लेकर किए जा रहे समझौते को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। स्थानीय किसान भवन में भारतीय किसान यूनियन के तत्वावधान में आयोजित किसान पंचायत में यह निर्णय लिया गया। किसान पंचायत की अध्यक्षता पंजाब प्रदेश के अध्यक्ष अजमेर सिंह लखोवाल व हरियाणा प्रदेश के अध्यक्ष रतनमान ने संयुक्त रूप से की। इस पंचायत में पंजाब व हरियाणा के किसानों ने भाग लिया।

प्रदेशाध्यक्ष रतनमान ने किसान पंचायत को संबोधित करते हुए कहा कि इस समझौते के विरोध में पूरे देश के किसान 24 अक्तूबर को रोष जाहिर करेंगे और इसी दिन सभी जिलों में उपायुक्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के नाम ज्ञापन सौंप कर अपनी आपत्ति दर्ज करवाएंगे। उन्होंने कहा कि 24 अक्तूबर को हरियाणा में मतगणना होने की वजह से 25 अक्तूबर को रोष प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आरसीईपी के समझौता होने के बाद अधिकांश कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क कम करके शून्य कर दिया जाएगा। इस समझौते की आढ़ में विश्व में कई देश भारत में अपनी कृषि उपज को खपाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसकी वजह से भारतीय किसान बर्बाद हो जाएगा। खासतौर पर डेयरी क्षेत्र में जो हमारे लाखों सीमांत किसान महिलाओं की जो आजीविका का जरिया है, वह चौपट हो जाएगा। क्योंकि विश्व के कई देशों में उनकी सरकारों द्वारा किसानों को भारी मात्रा में सब्सीडी दी जाती है। जबकि भारत में उन देशों के मुकाबले में किसान को सब्सीडी नहीं दी जा रही है। इसलिए भारत का किसान विश्व बाजार में मुकाबला करने में सक्षम नहीं है।

रतनमान ने कहा कि इस मसले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के किसानों के साथ बैठक करके आरसीईपी के समझौते पर बात करनी चाहिए, क्योंकि यह समझौता किसानों के हितों के साथ जुड़ा हुआ है। पंजाब के अध्यक्ष अजमेर सिंह लखोवाल ने कहा कि हमारे किसानों और कृषि पर इसके बुरे अनुभवों के साथ-साथ पूर्व में मुक्त व्यापार समझौते के हमारे अनुभवों के चलते आरसीईपी मेगा व्यापार समझौता और भी ज्यादा खतरनाक साबित होगा। सर्वविदित है कि इस समझौते में शामिल 15 देशों में से भारत सहित 11 देश व्यापार घाटे से जूझ रहे हैं। इसलिए इस समझौते को बिलकुल भी सहन नहीं किया जाएगा। इस अवसर पर पंजाब इकाई के महासचिव हरेंद्र सिंह लखोवाल, अंबाला मंडल अध्यक्ष नरपत सिंह राणा, पंचकूला अध्यक्ष गोपाल राणा, करनाल जिला संरक्षक मेहताब कादियान, पंचकूला जिला महासचिव सुशील कुमार, शमशेर सिंह, गुरविंद्र सिंह, अवतार सिंह मेहलो, रामकरण सिंह रामा सहित काफी संख्या में किसान मौजूद थे।

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