जब भावांतर योजना भी नहीं कर पाई भरपाई, तो किसान ने उठाया ये कदम

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Pardeep Dhankar, Yuva Haryana
Jhajhar, 5 May, 2018

पिछले दिनों हरियाणा के कृषि मंत्री ओपी धनखड़ द्वारा सब्जी उत्पादकों को उनके नुकसान की भरपाई करने के लिए शुरू की गई भावान्तर भरपाई योजना झज्जर में एक किसान के नुकसान की भरपाई नहीं कर पाई।

किसान अपने ट्रैक्टर-ट्राली में उत्पाद किए गए ट्रैक्टरों की कैरटें भरकर जिला मुख्यालय पर पहुंचा था। लेकिन यहां सब्जी मंडी,अनाज मंडी व बाद में किसान सदन में उसके उत्पादन की भरपाई करना तो दूर की बात भी नहीं की ।

अधिकारी उसकी बात सुनने को तैयार नहीं हुआ। किसान सदन में तो हालात यहां तक पहुंचे कि जैसे ही यहां मौजूद अधिकारियों ने किसान सदन के प्रांगण में टमाटरों से भरी ट्राली को आते देखा तो वह अपना कार्यालय छोडकऱ वहां से भाग खड़े हुए।

यहां बता दें कि पिछले दिनों प्रदेश के चरखी दादरी शहर में भी किसानों को अपने टमाटर का उचित मूल्य न मिलने के कारण उन्हें सडक़ पर फैंकना पड़ा था।

इसी कडी में सूबे के कृषि मंत्री ओपी धनखड़ के राजनीतिक हलके के गांव कलोई का किसान वेदप्रकाश अपने उत्पाद किए हुए टमाटरों को कैरेटों में भरकर व उन्हें ट्राली में लादकर जिला मुख्यालय पर स्थित सब्जी मंडी में लेकर पहुंचा था। लेकिन वहां जब उसे इन टमाटरों का कोई खरीददार नहीं मिला तो किसान वेदप्रकाश अपनी इसी ट्राली को लेकर अनाजमंडी पहुंचा।

यहां मौजूद अधिकारियों ने वहां के आढ़तियों को एकत्रितकर उसकी टमाटर की कैरेटों की बोली लगाने के लिए कहा। आढ़तियों ने बोली भी लगाई। लेकिन जब किसान वेदप्रकाश ने इन्हीं आढ़तियों से टमाटर की खरीद के बदले जे-फार्म पर हस्ताक्षर मांगे तो उन्होंने ऐसा करने से इन्कार कर दिया। हैरत की बात तो यह है कि किसान वेदप्रकाश अपने इस टमाटर को एक रूपया प्रति कैरेट देने को भी तैयार था। लेकिन इन सबके बावजूद भी उसे न तो कोई खरीद दार मिला और न हीं खरीद के बदले मिलने वाला जे-फार्म।

बाद में किसान वेदप्रकाश चिलचिलाती धूम में अपने टमाटरों से भरी इसी ट्राली को लेकर जहाजगढ़ मार्ग पर स्थित किसान सदन पहुंचा। लेकिन यहां जैसे ही उस द्वारा लगाए गए ब्रेक से उसके ट्रैक्टर के पहिए थमे तो वहां किसान सदन में मौजूद अधिकारी अपना कार्यालय छोड़ भाग खड़े हुए।

यह बोला किसान
चिलचिलाती धूप में मंडियों के चक्कर काटने व सम्बंधित विभाग के कर्मचारियों के चक्कर लगाने के बाद किसान वेदप्रकाश ने वहां मौजूद मीडिया के सामने अपनी आपबीती बताई। किसान का कहना था कि फसल योजना हो या फिर चाहे भावान्तर योजना। यह योजनाएं केवल और केवल दिखावे तक सीमित है। जबकि सच्चाई इनसे कोसों दूर है। दावे तो लंबे-चौड़े व बड़े-बड़े किए जाते है लेकिन धरातल पर यह योजनाएं केवल किसान के लिए परेशानी पैदा करने वाली ही है।

यह बोला मंडी सुपरवाईजर
उनके यहां पर गांव कलोई से वेदप्रकाश नामक किसान अपने टमाटर की कैरेट ट्राली में लादकर पहुंचा था। उसके टमाटर की बिक्री के लिए अनाजमंडी में ही आढ़तियों को एकत्रित भी किया गया था। लेकिन खरीद के बदले किसी भी आढ़ती ने जे फार्म देने से किसान को साफ मना कर दिया। जबकि भावान्तर योजना का लाभ लेने के लिए इसी जे फार्म की जरूरत होती है।

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