मंडियों में अन्नदाता को नियमों की ट्रिपल टेंशन, नमी-फर्द और रोस्टर सिस्टम से किसान परेशान

Breaking खेत-खलिहान हरियाणा

युवा हरियाणा
चंडीगढ़ (18 मार्च 2018)

प्रदेश की ज्यादातर मंडियों में 15 मार्च से सरसों की सरकारी खरीद शुरु हो चुकी है, लेकिन सरकारी नियमों ने किसानों की टेंशन बढ़ा दी है. सरकार ने पहली शर्त किसानों की फर्द लाने की लगा दी है तो दूसरी फसल में नमी को लेकर भी किसानों को नये नियम सुझा दिये हैं और तीसरा नियम रोस्टर सिस्टम ।

सरकारी सिस्टम की इन पेचिदगियों के चलते किसान अपनी सरसों की फसल व्यापारियों को बेचने को मजबूर हैं जिस वजह से किसानों को पूरे दाम नहीं मिल रहे हैं, किसानों को प्रति क्विंटल 700 से 800 रुपये का घाटा हो रहा है।

किसानों का कहना है कि इस सिस्टम से अन्नदाता को डबल टेंशन हो गई है. पहली तो मंडियों में रोस्टर के हिसाब से गांव की फसल खऱीदी जा रही है. जिस वजह से लंबा इंतजार करना पड़ रहा है. वहीं फसल बेचने के लिए जमीन की फर्द भी जरुरी कर दी है. इसलिए पटवारी के पास चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

कुछ किसानों का कहना है कि पटवारी और कागजी कार्रवाई के झंझट से बचने के लिए सरसों को कम दामों में ही व्यापारियों को सीधे बेचने को मजबूर हो गए हैं।

प्रदेश की मंडियों में भी लगातार सरसों की फसल पहुंच रही है लेकिन किसानों की फसलों में नमी और अन्य वजहों से भी खरीद नहीं हो रही है जिस वजह से किसानों को दिक्कतों को सामना करना पड़ रहा है।

रोहतक से किसान नेता प्रीतपाल सिंह बताते हैं कि मंडियों में किसानों को लेकर सरकार का कोई ध्यान नहीं है, किसानों को सिर्फ भटकाने का ही काम किया जा रहा है। प्रीतपाल सिंह ने बताया कि किसानों को फर्द लाने में 200 से 300 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं जिस वजह से किसानों को घाटा हो रहा है।

सिरसा में किसान नेता विकल पचार बताते हैं कि सिरसा की छह मंडियों में सरसों की फसल की खरीद होगी. उन्होने बताया कि सरसों की खरीद में कुछ दिक्कतें किसानों का आएंगी लेकिन किसानों के लिए वो हैल्प डेस्क लगाकर समझाने की भी कोशिश करेंगे. पचार बताते है कि सरकार ने पहली बार सरसों की फसल की खरीद शुरु की है जो किसानों के लिए अच्छी है।

किसानों के सिर पर शर्तों का भार, कैसे होगा ऐसे बेड़ा पार ?
1. किसानों को सरसों की फसल बेचने के लिए जमीन की फर्द लेनी होगी, जिसके लिए पटवारी के पास चक्कर काटने पड़ेंगे और करीब 200 से 300 रुपये का खर्च आएगा ।

2. किसानों की फसल बेचने के लिए रोस्टर सिस्टम सिस्टम लागू किया गया है जिस वजह से किसानों को अपने गांव के नाम के हिसाब से लंबा इंतजार करना पड़ेगा।

3. सरसों की फसल में नमी की मात्रा 8 फीसदी करने का सरकारी नियम है जबकि किसान 12 फीसदी नमी तक की मांग कर रहे हैं, क्योंकि अगर 8 फीसदी नमी की सरसों की खरीद होती है तो ज्यादातर सरसों की फसल खरीदने के लिए एक पंखवाड़े का इंतजार सरकार को इंतजाकर करना पड़ेगा ।

4. किसानों को अपनी सरसों की फसल मंडी में बेचने के लिए आधार कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड, पहचान पत्र समेत कई डाक्यूमेंट्स लाने के लिए निर्देश दिये गए हैं, ऐसे में किसानों को एक झोला तो कागजों का भरकर मंडी में पहुंचना पड़ेगा।

5. सरकारी नियम के मुताबिक एक किसान की एक दिन में 25 क्विंटल फसल ही खरीद होगी, ऐसे में जिन किसानों की ज्यादा जमीन है और ज्यादा फसल हैं उनके लिए नियमों में कोई विशेष व्याख्या नहीं की गई है।

6. किसानों को सरसों की फसल बेचने के लिए बैंक खाता नंबर, IFSC कोड, बैंक का नाम और एक पासपोर्ट साइज की फोटो लाने के लिए कहा गया है।

हरियाणा में इस प्रकार से मंडियों में किसानों की फसलों को खरीदने के लिए नियमों की लंबी चौड़ी लिस्ट लग गई है ऐसे में अब व्यापारियों को इससे फायदा होने के आसार नजर आ रहे हैं वहीं किसान अपनी फसल बिचौलियों और व्यापारियों की बेचने को मजबूर हैं। किसानों को भाव भी कम मिल रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *