बहादुरगढ़ में जमीन मुआवजे की मांग को लेकर धरने पर बैठे किसान, साथ लगते गांवों की जमीन से कम नहीं मिलना चाहिए मुआवजा

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Pradeep Dhankhar, Yuva Haryana

Bahadurgarh, 7 Feb, 2019

बहादुरगढ़ के छारा गांव में किसान जमीन मुआवजे की मांग को लेकर धरने पर बैठे हुए हैं। किसानों की मांग सिर्फ इतनी सी है कि उन्हें उनकी जमीन का मुआवजा साथ लगते गांवों की जमीन से कम नहीं मिलना चाहिए।

दरअसल, नेशनल हाईवे नम्बर 334 के लिए छारा और आसपास के कई गांवो की जमीन का अधिग्रहण किया गया था। छारा के साथ लगते भापड़ौदा गांव की जमीन का मुआवजा करीब सवा करोड़ रुपये दिया जा रहा है, जबकि छारा गांव की जमीन का मुआवजा 40 लाख के आसपास दिया जा रहा है। गांव वालों ने मुआवजा नहीं बढ़ाने की सूरत में अनिश्चितकाल तक धरना देने की बात कही है।

बता दें कि मेरठ से लोहारू तक जाने वाला नेशनल हाईवे नम्बर 334 विवादों में घिर गया है। झज्जर जिले के छारा गांव में किसान हाईवे में गई अपनी जमीन के सही मुआवजे के लिए धरने पर बैठ गए हैं। पिछले चार दिन से किसान धरने पर बैठे हैं, लेकिन सरकार और प्रशासन का कोई नुमाईंदा उनके पास नही पहुंचा है। किसानों का कहना है कि उनके साथ लगते गांव भापड़ौदा की जमीन का मुआवजा एक करोड़ से ज्यादा दिया गया है। जबकि उनकी जमीन का मुआवजा 40 लाख तक ही तय किया गया है, जो गलत है और वो ऐसा नहीं होने देंगे।

छारा गांव की करीब 85 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया है, जबकि आसपास के चार गांवों की करीब 75 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गयाहै। छारा गांव के किसानों का कहना है कि उनकी जमीन दूसरे गांव की जमीन से ज्यादा उपजाऊ है और अच्छी फसल पैदावार भी देती है। लेकिन उनके साथ सरकार गलत कर रही है। धरने पर बैठे किसानों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। किसानों का कहना है कि जब तक उनका मुआवजा नही बढ़ जाता तब तक वो धरना देते रहेंगे।

किसान फिलहाल सड़क के साथ में टेंट लगाकर धरना दे रहे है। लेकिन अगर जल्द किसानों के साथ बातचीत कर मामला नहीं सुलझाया गया तो सड़क के साथ बैठे किसान उत्तेजित होकर सड़क के बीच बैठने से भी गुरेज नहीं करेंगे।

 

 

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