पहले धान और अब आलू , मटर भी दे गए किसानों को धोखा

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Yuva Haryana

Kurushetra, 28 Dec,2018

क्षेत्र के किसानों की तकलीफें समाप्त होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। पहले धान में ओलों की मार ने किसानों को मोटा नुकसान पहुंचाया, तो किसानों ने खेतों में आलू और मटर की सब्जी को उत्साह के साथ लगाया कि गेूहं की फसल का घाटा आलू और मटर की फसल दूर करेगी। लेकिन दोनों सब्जियां मंडियों में किसान की दुर्गति करा रही हैं। इनमें किसानों का घाटा पूरा होना तो दूर की बात है,  किसानों को उल्टा नुकसान ही हो रहा है। आलू की फसल तो लागत भी पूरा नहीं करा पाई। वहीं ऐसी ही स्थिति मटर की भी बनी हुई है।

प्रदेश में पिछले दो वर्षों से किसानों के लिए शायद अच्छा समय नहीं चल रहा है। इस वर्ष पहले धान की फसल में ओलों की मार पड़ी तो उसके बाद नमी के नाम पर मंडियों में व्यापारियों ने खूब लूट मचाई। किसान यूनियन से लेकर अन्य किसान संगठनों के आंदोलनों के बाद भी किसानों को प्रति एकड़ दो सौ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।

उससे उभरने के लिए किसानों ने इस बार बड़ी मात्रा में आलू और मटर की फसल लगाई थी। आलू का मंडी में वर्तमान में भाव चार रुपये किलो है, जो लागत से आधा है। वहीं मटर पर भी 15 रुपये प्रति किलो का खर्च किसान को करना होता है, लेकिन भाव 10 से 12 रुपये प्रति किलो है। जिससे किसानों को दस से 15 हजार रुपये का प्रति एकड़ का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

साथ ही नील गाय भी खेतों में बड़ा नुकसान कर कही है। गांव अमीन के क्षेत्र में सबसे अधिक मटर की खेती होती है, लेकिन वहां पर नील गाय ने किसानों को परेशान किया। किसानों का कहना है कि गांव में सैकड़ों की संख्या में नील गाय हैं, जो मटरों को नुकसान पहुंचाती हैं। ये फसल को खाने के साथ ही उन्हें भारी मात्रा में तोड़ भी देती हैं।

इसके साथ ही क्षेत्र में पिछले कई दिनों से लगातार पारा पड़ रहा है। जो सब्जियों की फसलों का दुश्मन है और सबसे अधिक नुकसान टमाटर की फसल को होता है। क्षेत्र में जितना टमाटर लगाया गया है, उस पर पारे की मार पड़ रही है। कई एकड़ जमीन पारे की वजह से काली पड़ गई है और उस पर लगे फल खराब होने लगे हैं।

 

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