बहादुरगढ़ में मुआवजे को लेकर किसानों का एक और आंदोलन, सड़क के नवनिर्माण का ग्रामीणों ने किया विरोध

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Pradeep Dhankhar, Yuva Haryana

Bahadurgarh, 19 Feb, 2019

बहादुरगढ़ में जमीन के मुआवजे की मांग को लेकर किसानों का एक और आंदोलन शुरू होने जा रहा है। दरअसल, बहादुरगढ़ के गांव आसौदा -खरखोदा सड़क के नवनिर्माण का ग्रामीण विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग ने जमीन का मुआवजा दिए बिना ही सड़क बनाई थी और अब उस पर नव निर्माण किया जा रहा है।

हालांकि  किसान जब कोर्ट में गए थे, तो एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज ने 2013 में किसानों के हक में फैसला सुनाया था और हरियाणा सरकार को 6 महीने में जमीन एक्सचेंज करने की कार्रवाई पूरे करने की हिदायत दी थी। जमीन एक्सचेंज नहीं कर पाने की सूरत में किसानों को हर महीने 5000 रुपये का कंपनसेशन देने के आदेश भी जारी किए थे।

लेकिन पीडब्ल्यूडी विभाग ने ना तो किसानों की जमीन एक्सचेंज की और ना ही उन्हें कंपनसेशन दिया। भारत भूमि बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष रमेश दलाल की अगुवाई में किसानों ने सरकार को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि जब तक सरकार उन्हें उनकी जमीन का मुआवजा नहीं देती, तब तक वह इस सड़क का निर्माण नहीं होने देंगे।

किसान नेता रमेश दलाल का कहना है कि 1957 में आसौदा और खरखोदा के बीच यह सड़क बनी थी। उस समय भी किसानों को मुआवजा नहीं दिया गया था और कोर्ट में केस जीतने के बावजूद भी ना तो सरकार और ना ही पीडब्ल्यूडी विभाग ने इस ओर कोई ध्यान दिया। उनका कहना है कि वे विकास में बाधा नहीं पहुंचाना चाहते।

इसलिए सरकार से उन्होंने मांग की है कि इस सड़क को केएमपी एक्सप्रेस-वे के साथ-साथ फोरलेन बनाना चाहिए। लेकिन किसानों का मुआवजा पहले के ब्याज समेत और अब नए रेट की सबसे दिया जाना चाहिए। वहीं पीड़ित किसानों का कहना है कि विभाग ने कोर्ट के आदेशों की अवहेलना की है। ऐसे में अब उन्होंने 5000 रुपये महीने का कंपनसेशन लेने के लिए भी कोर्ट की शरण ली है ।

साथ ही सरकार से जल्द से जल्द मुआवजा देने की मांग भी की है। हम आपको बता दें कि भारत भूमि बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष रमेश दलाल के नेतृत्व में प्रदेश की पूर्व की हुड्डा सरकार के शासनकाल में भी इसी मांग को लेकर ढाई महीने धरना दिया गया था। जमीन के मुआवजे को लेकर अब भी छारा गांव में किसानों का धरना जारी है।

 

 

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