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Friday, September 18, 2020

फसल बीमा करने वाली कंपनियों का बढ़ा मुनाफा, किसानों के आज भी हालात बदत्तर

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Sahab Ram, Yuva Haryana
Chandigarh, 13 Nov, 2018
आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने आरटीआई के तहत केन्द्रीय कृषि मंत्रालय से प्राप्त सूचनाओं से खुलासा किया है कि बहुचर्चित प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को दो वर्षों में पूरे देश के 85 लाख किसानों ने छोड़ दिया है। इस योजना को छोडऩे वाले किसानों में 80 प्रतिशत(कुल 68 लाख) किसान भाजपा शासित चार राज्यों से हैं।
सरकारी क्षेत्र की एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कम्पनी ऑफ इंडिया (ए.आई.सी.) के इलावा कुल दस निजी बीमा कम्पनियों ने इस योजना से इसी दौरान कुल 15,795 करोड़ रूपये कमाए। चार बड़े राज्यों मध्य प्रदेश (2.90 लाख), राजस्थान (31.25 लाख), महाराष्ट (19.47 लाख) व यूपी (14.69) में कुल 1.06 करोड़ किसानों का योजना से मोहभंग हो गया। वर्ष 2016-17 में बीमा कम्पनियों की औसत कमाई प्रतिमाह 538.30 करोड़ रूपये प्रति माह तो वर्ष 2017-18 में यह औसत कमाई बढक़र प्रतिदिन 778 करोड़  रूपये प्रतिमाह हो गई। वर्ष 2016-17 में 5.72 करोड़ कुल किसान बीमाकृत किए गए तो वर्ष 2017-18 में इनकी संख्या 85 लाख घटकर 4.87 करोड़ रह गई। जबकि बीमा कम्पनियों को वर्ष 2016-17 में वार्षिक मुनाफा कुल 6459.64 करोड़ रूपये हुआ तो वर्ष 2017-18 में बीमा कम्पनियों के इस मुनाफे में 150 प्रतिशत की वृद्धि होकर यह राशि कुल 9335.62 करोड़ रूपये हो गई।
पंजाब राज्य में यह योजना लागू नहीं है वरना बीमा कम्पनियों की तिजौरी और भी ज्यादा भरती। गुजरात में दो वर्षों में बीमा कम्पनियों के लाभ में 5548 प्रतिशत की रिकार्ड वृद्धि हुई। वर्ष 2016-17 में बीमा कम्पनियों ने गुजरात में मात्र 40.16 करोड़ रूपये मुनाफा कमाया तो वर्ष 2017-18 में यह कमाई 2222.58 करोड़ रूपये पहुंच गई। गुजरात में न्यू इंडिया कम्पनी ने अकेले 1429 करोड़ रूपये कमाए। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों के बीमा करने के लिए भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (कृषि मंत्रालय) ने कुल दस निजी कम्पनियों व भारत सरकार की एग्रीकल्चर इंश्योरेंश कम्पनी ऑफ इंडिया को अधिकृत कर रखा है।
वर्ष 2016-17 में बीमा कम्पनियों के कुल मुनाफे में सर्वाधिक 2610.60 करोड़ रूपये का मुनाफाा कमाने वाली सरकारी क्षेत्र की एकमात्र कम्पनी एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कम्पनी ऑफ इंडिया (ए.आई.सी) द्वारा अगले वर्ष 2017-18 में सिर्फ डेढ़ करोड़ किसानों का बीमा कर पाना व मात्र 528 करोड़ रूपये की बचत कर पाना बहुत बड़े घोटाले को स्पष्ट करता है। दो वर्षों के दौरान न्यू इंडिया कम्पनी को सर्वाधिक 2226 करोड़ रूपये मुनाफा हुआ। एचडीएफसी को 1817.74 करोड़ व रिलायंस कम्पनी को कुल 1461.20 करोड़ रूपये का मुनाफा हुआ।
योजना को घोटाला बताया:-
यह खुलासा करने वाले पानीपत के आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना हर वर्ष सरकारी संरक्षण में चलने वाला एक बहुत बड़ा घोटाला है। किसानों के नाम पर निजी बीमा कम्पनियों की तिजौरियां भरी जा रही हैं। योजना पूरी तरह से फ्लॉप हो चुकी है। यह राशि निजी बीमा कम्पनियों को लुटवाने की बजाए सीधे किसानों को दी जाती तो किसानों की स्थिति में सुधार होता। कपूर ने बताया कि 12 सितम्बर की उनकी आरटीआई के जवाब में गत 14 अक्टूबर के पत्र से कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय भारत सरकार की उपायुक्त कामना आर० शर्मा ने सूचना दी है।
बीमाकृत किसान घटे, कम्पनियों के मुनाफे बढ़े:-
वर्ष 2016-17 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से कुल 5,72,17,159 किसान जुड़े थे तो एक वर्ष बाद (वर्ष 2017-18) में 84.47 लाख किसानों ने इस योजना को छोड़ दिया। किसानों की संख्या (वर्ष 2017-18) में घट कर कुल 4,87,70,515 रह गई। जबकि वर्ष 2016-17 में कुल 17,902.47 करोड़ रूपये मुआवजा राशि देने के बावजूद भी बीमा कम्पनियों नेे कुल 6459.64 करोड़ रूपये का मुनाफा हुआ। इसी प्रकार वर्ष 2017-18 में किसानों को कुल 15,710.25 करोड़ रूपये मुआवजा राशि अदा करने के बावजूद बीमा कम्पनियों को कुल 9335.62 करोड़ रूपये कम्पनियों की तिजौरी में मुनाफे के नाम पर पहुंच गए। यानि किसान घटते गए तो कम्पनियों के मुनाफे बढ़ते गए।
सवाल जो जवाब मांगते है:-
फसल बीमा योजना क्या राकेट साईंस थी जो निजी कम्पनियों को अधिकृत किया गया। वर्ष 2016-17 में सरकारी कम्पनी (ए.आई.सी) ने देश के 21 राज्यों में कुल 2,46,83,612 किसानों का बीमा करके कुल 7984.56 करोड़ का प्रीमियम एकत्रित किया। कुल 5373.96 करोड़ रूपये का मुआवजा राशि देने के बावजूद सर्वाधिक 2610.60 करोड़ रूपये लाभ कमाने वाली इस सरकारी बीमा कम्पनी (ए.आई.सी) को अगले वर्ष 2017-18 में मात्र 1.5 करोड़ किसानों के बीमे कर पाई। ऐसा क्यों? सिर्फ इसलिए ताकि प्राईवेट कम्पनियां खुलकर लूट कर सकें।
किसानों के नाम पर बीमा कम्पनियों की तिजौरियां यूं भरी गई:- 
दो वर्षों में कुल 10.60 करोड़ किसानों से कुल प्रीमियम राशि 49,408 करोड़ रूपये लेकर इसमें से कुल 33,612.72 करोड़ रूपये मुआवजा राशि कुल 4.27 करोड़ किसानों को बांटकर शेष बचे 15,795.26 करोड़ रूपये मुनाफेे के नाम पर कुल दस बीमा कम्पनियों की तिजौरी में भर दिए गए।
अधिकृत दस निजी कम्पनियां व एक सरकारी कम्पनी:
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों की फसलों बीमे करने के लिए भारत सरकार के कृषि, सहकारिता एवं कृषक कल्याण विभाग (कृषि मंत्रालय) ने कुल दस निजि बीमा कम्पनियों को अधिकृत कर रखा है। इनमें आईसीआईसी लोम्बार्ड, रिलायंस, टाटा-एआईजी, यूनिवर्सल, बजाज आलियन, फ्यूचर, एसबीआई, एचडीएफसी, इफको-टोकियो, चोलमंडलम शािमल है। इनके इलावा एक सरकारी  बीमा कम्पनी एग्रीकल्चर इंश्योरंस कम्पनी ऑफ इंडिया (एआईसी) भी अधिकृत है।
मध्य प्रदेश के आंकड़े:-
भाजपा शासित मध्य प्रदेश में वर्ष 2016-17 में बीमाकृत किसानों की संख्या 71,81,242 थी तो वर्ष 2017-18 में यह संख्या घटकर 68,90,930 रह गई। यानि कुल 2,90,312 किसानों ने योजना छोड़ दी। वर्ष (2016-17) में कुल एकत्रित 3852.24 करोड़ रूपये का प्रीमियम राशि में से 1979.92 करोड़ रूपये का मुआवजा राशि देने के बाद बीमा कम्पनियों को कुल 1862.32 करोड़ रूपये का लाभ हुआ। वहीं अगले वर्ष (2017-18) में बीमाकृत किसानों की संख्या में रिकार्ड 2.90 लाख की गिरावट के कारण बीमा कम्पनियों का लाभ सिर्फ 39.21 करोड़ रूपये रह गया। कुल 1302.84 करोड़ रूपये प्रीमिय राशि किसानों से ले कर कुल 1263.63 करोड़ रूपये मुआवजा राशि किसानों को दी।
महाराष्ट्र के आंकड़े:-
महाराष्ट्र में वर्ष 2016-17 में बीमाकृत किसानों की कुल संख्या 1,20,01252 थी तो वर्ष 2017-18 में घटकर कर 1,0054260 रह गई। यानि कुल 19.47 लाख किसान छोड़ गए। वर्ष 2016-17 मे कुल 4739.74 करोड़ रूपये की प्रीमियम राशि किसानों से लेकर उन्हें कुल 2315.51 करोड़ रूपये का क्लेम दिया गया। यानि बीमा कम्पनियों को कुल 2424.23 करोड़ रूपये का लाभ हुआ।
जबकि वर्ष 2017-18 में कुल 4402.30 करोड़ रूपये की प्रीमियम राशि वसूल कर कुल 2784.36 करोड़ रूपये का मुआवजा दिया गया। यानि कुल 1617.94 करोड़ रूपये का मुनाफा बीमा कम्पनियों को हुआ।
राजस्थान के आंकड़े:-
राजस्थान में दो वर्षों में कुल 31.25 लाख किसान इस योजना को छोड़ गए। वर्ष 2016-17 में बीमा कम्पनियों ने कुल 91,50,224 किसानों की फसलों का बीमा किया था। कुल 2591.30 करोड़ रूपये की प्रीमियम राशि वसूल कर 1841.25 करोड़ रूपये का मुआवजा दिया था। यानि बीमा कम्पनियों को वर्ष 2016-17 में कुल लाभ 750 करोड़ रूपये का हुआ। वहीं वर्ष 2017-18 में कुल 31.25 लाख किसानों के इस योजना से पीछे हटने से बीमाकृत किसानों की संख्या घटकर 60,25,199 रह गई। इस दौरान 1983 करोड़ रूपये की प्रीमियम राशि किसानों से लेकर उन्हें कुल 1378.45 करोड़ रूपये मुआवजे में बांट दिए गए। यानि कुल 604.45 करोड़ रूपये का लाभ बीमा कम्पनियों को हुआ।
उत्तर प्रदेश के आंकड़े:-
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2016-17 में कुल 67,69,968  किसानों का बीमा किया गया, जबकि अगले वर्ष  2017-18 में यह संख्या घटकर 53,00,916 रह गई। यानि दो वर्षों में करीब पंद्रह लाख किसानों का इस योजना से मोहभंग हो गया। जबकि वर्ष 2016-17 में बीमा कम्पनियों ने कुल 1103.14 करोड़ रूपये प्रीमियम राशि एकत्रित की तथा इसमें से 554.20 करोड़ रूपये मुआवजा राशि बांटकर कुल 548.94 करोड़ रूपये लाभ कमाया। जबकि वर्ष 2017-18 में बीमा कम्पनियों ने कुल 1380.40 करोड़ रूपये प्रीमियम राशि एकत्रित कर कुल 333.59 करोड़ रूपये मुुआवजा राशि बांटकर कुल 1046.81 करोड़ रूपये का मुनाफा बटोर लिया।
गुजरात राज्य के आंकड़े:-
गुजरात में वर्ष 2016-17 में कुल बीमाकृत किसानों की संख्या 5,20,025 थी तो वर्ष 2017-18 में यह बढक़र 17,63,490 हो गई। यानि 12,43,465 बीमाकृत किसानों की संख्या बढ़ गई। वर्ष 2016-17 में कुल वसूली गई 173.94 करोड़ रूपये की राशि में से 133.87 करोड़ रूपये मुआवजा राशि बांटने से बीमा कम्पनियों को कुल 40.07 करोड़ रूपये का लाभ मिला। वर्ष 2017-18 में 3262.17 करोड़ प्रीमियम राशि में से 1039.59 करोड़ रूपये मुआवजा बांटकर कुल 2222.58 करोड़ रूपये कम्पनियों ने कमा लिए।
पश्चिम बंगाल के आंकड़े:-
ममता बनर्जी शासित पश्चिम बंगाल में भी 2,23,940 किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को त्याग दिया। वर्ष 2016-17 में बीमाकृत किसानों की कुल संख्या 41,33,279 थी तो वर्ष 2017-18 में 2,23,940 घटकर 39,09,339 रह गई। जबकि बीमा कम्पनियों का लाभ जो वर्ष 2016-17 में कुल 321.26 करोड़ था वह 2017-18 में बढक़र 547.87 करोड़ पहुंच गया।
तमिलनाडु के आंकड़े:-
तमिलनाडु में वर्ष 2016-17 में बीमा कम्पनियों को 2128.25 करोड़ रूपये का नुकसान झेलना पड़ा। वर्ष 2016-17 में कुल प्रीमियम राशि 1227.37 करोड़ रही तो मुआवजा राशि में कुल 3355.62 करोड़ रूपये देने पड़े।  हालांकि अगले वर्ष 2017-18 में किसानों की संख्या में 25,295 की कटौती के बावजूद बीमा कम्पनियों को कुल 1375.53 करोड़ रूपये का लाभ हुआ। वर्ष 2017-18 में कुल प्रीमियम राशि 1395.53 करोड़ वसूली तो मुआवजा राशि मात्र 20 करोड़ ही दी। वर्ष 2016-17 में बीमाकृत कुल किसान 14,11,228 में तो वर्ष 2017-18 में घटकर 13,85,933 रह गए।
कर्नाटक के आंकड़े:-
कर्नाटका में किसान घटे लेकिन बीमा कम्पनियों का मुनाफा बढ़। वर्ष 2016-17 में कुल 27,37,667 किसानों का बीमा हुआ तो वर्ष 2017-18 में 11,29,090 किसानों के स्कीम छोडऩे से यह संख्या घटकर 16,08,569 रह गई। जहां वर्ष 2016-17 में कुल 1,548.90 की प्रीमियम राशि वसूली वहीं क्लेम राशि 1790.68 करोड़ देने से कम्पनियों को 241.79 करोड़ का नुकसान हुआ। लेकिन अगले ही वर्ष 2017-18 में बीमा कम्पनियों ने कुल 1930.12 करोड़ रूपये का प्रीमियम वसूल कर व मात्र 587.54 करोड़ रूपये क्लेम राशि देकर 1342.58 करोड़ का मुनाफा कमा लिया। इसमें अकेले यूनिवर्सल कम्पनी को 978.84 करोड़ रूपये का लाभ हुआ। इसने 1150 करोड़ रूपये प्रीमियम राशि वसूली जबकि क्लेम राशि में मात्र 171.16 करोड़ दिए।
हरियाणा के आंकड़े:-
भाजपा शासित हरियाणा में दो वर्ष में बीमाकृत किसानों की संख्या में 15,228 की वृद्धि हुई। जहां वर्ष 2016-17 में बीमाकृत किसानों की कुल संख्या 13,36,028 थी वहीं वर्ष 2017-18 में यह बढक़र 13,51,256 हो गई। वर्ष 2016-17 में किसानों से कुल 364.39 करोड़ रूपये प्रीमियम राशि वसूल कर उन्हें कुल 292.55 करोड़ रूपये की मुआवजा राशि दी गई। बीमा कम्पनियों को वर्ष 2016-17 में कुल 71.83 करोड़ का लाभ हुआ। वर्ष 2017-18 में बीमा कम्पनियों ने कुल 453 करोड़ रूपये का प्रीमियम वसूला जबकि किसानों को मुआवजेे में 358 करोड़ रूपये देकर कुल 95 करोड़ रूपये कमाए।

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