फाईबर केबल बिछाने वाला गुरुग्राम देश का पहला शहर होगा, लोगों को मिलेगी बेहतरीन सुविधाएं

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Manu Mehta, Yuva Haryana
Gurugram, 03 August, 2018

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज गुरुग्राम में आयोजित गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण की कार्यकारी समिति की बैठक में गुरुग्राम शहर में सीसीटीवी कैमरे, गुरुग्राम के सैक्टर-72 में वाटर बुस्टिंग स्टेशन की स्थापना, सैक्टर-58 से 115 तक के नए सैक्टरों में पेयजल आपूर्ति की लाईने बिछाने और पानी व सीवरेज की दरें निर्धारित करने के प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई।

मुख्यमंत्री को बैठक में बताया गया कि गुरुग्राम शहर में सर्वेलेंस प्रणाली को मजबूत करने के लिए 1926 सीसीटीवी कैमरे 358 स्थानों पर लगाए जाएंगे। इसके लिए शहर में फाइवर केबल बिछाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। ये सभी कैमरे कमांड कंट्रोल सेंटर से जुड़े होंगे। बैठक में यह भी बताया गया कि इस फाइबर केबल के माध्यम से शहर में सभी तरह की स्मार्ट सर्विसिज उपलब्ध करवाई जाएगी और इस प्रकार की फाईबर केबल बिछाने वाला गुरुग्राम देश का पहला शहर होगा। फाइबर केबल की फीड सारे सरकारी विभागों, पुलिस थानों, स्कूलों और संस्थाओं में दी जाएगी।  इससे इंटरनेट तथा वाई-फाई की सुविधाएं भी मिल सकेंगी। यही नहीं, शहर में शापिंग मॉल तथा अन्य निजी संस्थानों में लगे लगभग 60000 सीसीटीवी कैमरों को भी इस नेटवर्क के साथ जोड़ा जाएगा और इसका कंट्रोल जीएमडीए के पास रहेगा। इस सुविधा से यातायात प्रबंधन को भी मदद मिलेगी।

इस परियेाजना पर लगभग 65 करोड़ रुपए का खर्च आएगा, जिसमें से 25 करोड़ रुपए हरियाणा पुलिस विभाग द्वारा खर्च किये जाएंगे और इस परियोजना का पहला चरण 9 माह में पूरा होगा जिसके तहत गुरुग्राम-मानेसर अर्बन काम्पलैक्स विकास योजना की 600 किलोमीटर सडकों को कवर किया जाएगा। बैठक में यह भी बताया गया कि इन सीसीटीवी कैमरों में कैप्चर की जाने वाली वीडियो फीड कैमरे में सात दिन और कमांड कंट्रोल सेंटर में 30 दिन तक उपलब्ध रहेगी। फाइबर केबल बिछाने के लिए जीएमडीए द्वारा गुरुग्राम-मानेसर अर्बन कम्पलैक्स विकास योजना के अधीन क्षेत्र क ो 6 भांगों में बांटा गया है। इस परियोजना के तहत यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों का ई-चालान अपने आप कट जाएगा। इसके अलावा, अपराध पर अंकुश लगाने में भी सहयोग मिलेगा।

बैठक में गुरुग्राम के सेक्टर-72 में वाटर बूस्टिंग स्टेशन स्थापित करने को भी मंजूरी प्रदान की गई जिस पर लगभग 67 करोड़ रुपए खर्च होंगे। मुख्यमंत्री को बताया गया कि 6 एकड़ में बनने वाले इस बूस्टिंग स्टेशन से गुरुग्राम के नए विकसित किए जा रहे सैक्टर 58 से 80 में पेयजल आपूर्ति होगी और इसकी क्षमता 24 हजार किलो लीटर की होगी।

बैठक में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने गुरुग्राम के सेक्टर 58 से 115  में  पेजयल आपूर्ति की लाइने बिछाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी। इस परियोजना के तहत वर्तमान पेयजल आपूर्ति वितरण प्रणाली को दोबारा से डिजाईन किया गया है। बैठक में बताया गया कि सैक्टर 58 से 115 में एक अनुमान के अनुसार 173.80 एमजीडी पानी की आवश्यकता होगी। इस परियोजना पर लगभग 227 करोड़ रुपए खर्च आएगा।

मुख्यमंत्री ने बैठक में अधिकारियों से कहा कि वे भूजल दोहन कम करने पर बल दें। उन्होंने कहा कि हम पानी से मुनाफा नहीं कमाना चाहते लेकिन इस तरह के उपाय किए जाएं कि जमीन से पानी कम निकाला जाए। बैठक में पानी व सीवरेज की दरों पर विस्तार से चर्चा हुई। जीएमडीए ने प्रस्ताव रखा कि देश के अन्य बड़े शहरों के मुकाबले यहां पर दरें काफी कम रखी गई है। गुरुग्राम में जीएमडीए द्वारा जलापूर्ति का शुल्क 9 रुपए प्रति किलोलीटर निर्धारित करने का प्रस्ताव रखा, जिस पर मुख्यमंत्री ने अपनी मंजूरी प्रदान कर दी। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने सीवरेज के शोधित पानी का प्रयोग पार्कों में सिंचाई तथा खेल के मैदान, स्टेडियम इत्यादि में करने पर बल दिया। बैठक में बताया गया कि जीएमडीए द्वारा आगामी एक अक्तूबर से पानी व सीवरेज की बिलिंग शुरू कर दी जाएगी।

इसके अलावा, बैठक में हुडा सिटी सेंटर जंक्शन की सुधारीकरण परियोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। इस परियोजना को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा और मुख्यमंत्री ने इस परियोजना के लिए अधिकारियों को अध्ययन करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि इस जंक्शन पर लोगों को असुविधा न हो, ऐसे प्रयास किए जाएंं। बैठक में गुरुग्राम के सैक्टर 29 स्थित लेजर वैली पार्क का नाम बदलकर महाराणा प्रताप स्वर्ण जंयती पार्क रखने का प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। इसके अलावा, हरियाणा मास रैपिड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन लि. द्वारा गुरुग्राम के खेडकी दौला में वाहनों के सुचारू आवागमन के लिए मल्टी माडल ट्रांजिड सेंटर (एमएमटीसी) विकसित करने पर भी विस्तार से चर्चा की गई और मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि इस परियोजना पर गहन अध्ययन करके प्रस्ताव पुन: रखा जाए।

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