हरियाणा स्टेट हायर एजुकेशन काउंसिल के चैयरमैन बृजकिशोर कुठियाला पर धोखाधड़ी का मामला हुआ दर्ज

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Yuva Haryana

Chandigarh, 15 April, 2019

भोपाल स्थित आर्थिक अपराध शाखा ने हरियाणा स्टेट हायर एजुकेशन काउंसिल के चैयरमैन बृजकिशोर कुठियाला पर धोखाधड़ी और अपराधिक षडयंत्र करने की एफआईआर दर्ज की है। बताया जा रहा है कि यह मामला माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय में उनके बतौर कुलपति कार्यकाल से जुड़ा है। इसके साथ ही विवि के 19 प्रोफेसरों और कर्मचारियों पर भी केस दर्ज किया गया है।

ईओडब्ल्यू ने एफआईआर में बताया है कि 2003 से 2018 के बीच संस्थान में यूजीसी के नियमों के विपरीत अपात्र व्यक्तियों की नियुक्ति की गई। कुठियाला ने विश्वविद्यालय के अकाउंट से संघ से जुड़ी संस्थाओं व अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद सहित अन्य संस्थाओं को मनमाने भुगतान किए। इसके अलावा खुद व परिवार के सदस्यों पर भी खर्च किया।

माखनलाल विवि में कुठियाला ने 2010 से 2018 के बीच एबीवीपी को 8 लाख रु., राष्ट्रीय ज्ञान संगम के लिए 9.50 लाख, जम्मू कश्मीर अध्ययन केंद्र द्वारा श्री श्री रविशंकर के आश्रम में आयोजित राष्ट्रीय विद्वत संगम के लिए 3 लाख, भारतीय वेब प्राइवेट लि. नागपुर को 46.607 हजार रुपए का भुगतान किया था। कुठियाला से जब इस मामले में पक्ष जानना चाहा, तो उन्होंने मैसेज का जवाब ही नहीं दिया।

मध्यप्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनने के एक महीने बाद ही पत्रकारिता विवि में हुई नियुक्तियों व आर्थिक गड़बड़ियों की जांच के लिए 18 जनवरी को अपर मुख्य सचिव एम गोपाल रेड्डी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी बनाई थी।

कुठियाला माखनलाल विवि के कुलपति पद से 21 जनवरी 2018 को रिटायर हुए। इसके बाद हरियाणा सरकार ने उन पर कोर्ट में चल रहे मामलों को अनदेखा करते हुए मार्च 2018 में उन्हें स्टेट हायर एजुकेशन काउंसिल का चेयरमैन बना दिया।

इसके अलावा कुठियाला हरियाणा के कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी और गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी, हिसार के कार्यकाल के दौरान नियुक्तियों को लेकर विवादों में रहे हैं।

उन पर 1993 में एक साल का लेक्चरर पद पर अनुभव ज्यादा बता केयू में रीडर पद अर्जित करने का आरोप लगा था।

साथ ही 2007 में हुड्‌डा सरकार में कुठियाला को उस आवेदन के आधार पर केयू में निदेशक पद पर नियुक्ति मिली थी,  जिस पर उनके हस्ताक्षर ही नहीं थे।

केयू में इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन एंड मीडिया टेक्नोलॉजी विभाग के निदेशक रहते 1 प्रोफेसर व 2 लेक्चचर्स को नियुक्ति देने का मामला हाईकोर्ट में है। विवि की एक और शिक्षिका डॉ. मधुदीप सिंह (जो प्रो. कुठियाला की पीएचडी छात्रा रही हैं) और प्रोफेसर पद पर डॉ. राजबीर सिंह की नियुक्ति को हाईकोर्ट में चुनौती दी जा चुकी है।

जीजेयू में मास कम्युनिकेशन विभाग का निदेशक रहते यूजीसी के स्पेशल असिस्टेंस प्रोग्राम के 20 लाख रु. अनुदान, कार्य समय पर न करने, फंड का उपयोग न करने, आदि मामलों में कुठियाला से तत्कालीन कुलपति ने जवाब तलब किया था। रिटायरमेंट के बाद नो-ड्यूज तक सबमिट नहीं किए।

 

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