21 वें कॉमनवेल्थ गेम्स में देश को मिला पहला मेडल, वेटलिफ्टर गुरुराजा पुजारी ने सिल्वर जीता

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Yuva Haryana

Panchkula (5 April 2018)

21 वें कॉमनवेल्थ गेम्स का आगाज हो चुका है। जहां भारतीय दल 94 साल बाद एक ही ड्रैस में दिखा, वहीं भारत ने पहले ही दिन बड़ी कामयाबी मिली। वेटलिफ्टर गुरुराजा पुजारी ने 56 किलोग्राम (पुरूष) कैटेगरी में सिल्वर जीता।

मलेशिया के मोहम्मद एएच इजहार अहमद ने गोल्ड अपने नाम किया। वहीं, श्रीलंका के चतुरंगा लकमल को कांस्य पदक मिला। 2014 ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के सुखन डे ने 56 किग्रा (मेंस) कैटेगरी में गोल्ड जीता था। उन्होंने कुल 248 किग्रा का वजन उठाया था। इस बार गुरुराजा कुल 249 किग्रा का वजन उठाने के बाद भी सिल्वर मेडल ले पाए।

बता दें कि गुरुराजा कर्नाटक के रहने वाले हैं और उनके पिता ट्रक चलाते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर होने के बाद भी उनके परिवार ने उन्हें वो हर चीज दिलाई, जो उनके इस गेम को बेहतर बनाने के लिए जरूरी थी। 25 साल के गुरुराजा पुजारी ने 56 किलोग्राम (मेंस) कैटेगरी में कुल 249 किग्रा (स्नैच में 111 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 138 किग्रा) वजन उठाया।

गुरुराजा ने स्नैच की पहली कोशिश में 107 किग्रा भार उठाया। फिर उन्होंने 111 किग्रा भार उठाने की कोशिश की, लेकिन फाउल कर गए। तीसरी कोशिश में उन्होंने 111 किग्रा भार उठाया।

इसी तरह, क्लीन एंड जर्क की पहली कोशिश में 138 किग्रा भार ऑप्ट किया, लेकिन फाउल कर गए। दूसरी कोशिश में भी 138 किग्रा भार ऑप्ट किया, लेकिन इस बार भी वह फाउल कर गए। हालांकि, तीसरी और आखिरी कोशिश में उन्होंने 138 किग्रा का वजन उठाकर सिल्वर पक्का कर लिया। इस कैटेगरी में 12 देशों ने हिस्सा लिया था।


गुरुराजा मूल रूप से कोस्टल कर्नाटक में कुंडूपारा के रहने वाले हैं। उनके पिता पिक-अप ट्रक ड्राइवर हैं। उन्होंने 2010 में वेटलिफ्टिंग करियर शुरू किया था। शुरू में उनके सामने कई परेशानियां आईं। डाइट और सप्लीमेंट्स के लिए पैसे की जरूरत होती थी, जो उनके पास नहीं थे, लेकिन उनके पिता ने उन्हें हिम्मत नहीं हारने दी। उनके परिवार में आठ लोग हैं। गुरुराजा बताते हैं कि हालांकि बाद में धीरे-धीरे चीजें बेहतर होती गईं।

 

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