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Wednesday, September 23, 2020

हिसार केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान की बड़ी सफलता, विश्व में पहली बार लैब से बाहर पैदा हुआ क्लोन कटड़ा

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Vinod Saini, Yuva Haryana

Hisar, 5 April, 2018

हिसार स्थित केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों की मदद से दुनिया में पहली बार लैबोरेट्री से बाहर क्लोन कटड़ा पैदा कर पशुपालन के क्षेत्र में ये इतिहासिक सफलता हासिल की गई है।

लैबोरेट्री से बाहर साढ़े दस महीने में पैदा हुए 54.2  किलो वजन दुनिया के इस पहले क्लोन कटड़े के सीमन से और अधिक क्लोन तैयार किए जाएंगे।

जिससे की अच्छी किस्म की भैंसे तैयार होंगी और ये तकनीक पशुपालन के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगी।

हरियाणा ने जो सफलता हासिल की है, ये तकनीक विश्व में किसी भी भैंस अनुंसधान संस्थान ने अभी तक हासिल नहीं की है।

वैज्ञानिकों की टीम ने सफलता पूर्व असम की भैंस का क्लोन कटड़ा तैयार किया है। ये भैंस केवल उत्तर पूर्व राज्यों में पाई जाती है और मुख्य रूप से कृषि के लिए उपयोगी है।

लैब से बाहर साढ़े 10 माह में 54.2 किलोग्राम वजन का कटड़ा पैदा हुआ है। इस क्लोनिंग कटड़े का वजन रोजाना 750 ग्राम बढ़ रहा है। आमतौर पर लैबोरेट्री के अंदर पैदा किए गए क्लोन का वजन 35 किग्रा होता है लेकिन लैब से बाहर पैदा हुए इस क्लोन का वजन कई गुना ज्यादा होने से पशु वैज्ञानिक भी हैरत में हैं। रिसर्च टीम के वैज्ञानिकों की मानें तो इस क्लोनिंग कटड़े के सींग मुर्राह नस्ल की तरह मुड़े हुए नहीं बल्कि बिल्कुल सीधे होंगे।

भैंस अनुसंधान केंद्र के प्रधान डा. प्रेम सिंह ने बताया कि सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा की सच डेयरी ने उन्हें काफी पशु उपलब्ध करवाए थे, जिसमें उन्होंने क्लोन कटड़ा पैदा किया है।

टीम ने असम स्थित केंद्र के नेटवर्क सेंटर से असमीज़ भैंसें के पूंछ से क्लोन का रेशा और दिल्ली के स्लॉटर हाउस से एक भैंस की ओवरी ली। इसके बाद लैब में भ्रूण तैयार किया। जिस दिन भ्रूण तैयार किया, उसी दिन हीट में आई भैंस की सच डेयरी में पहचान की और जब भ्रूण 6 दिन का हो गया तो वो उस भैंस में सिंक्रोनाइज कर दिया। सच डेयरी का चयन इसलिए किया क्योंकि इसमें 700 के करीब भैंस हैं।

उन्होंने कहा कि इससे अच्छी किस्म के झोटे तैयार किए जा सकेंगे जिससे भैंस पालने वाले पशु पालकों को काफी लाभ मिलेगा।

 

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