अस्पताल में रोगियों के लिए इलाज पहली प्राथमिकता, बाद में होगी कागजी कार्यवाही

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अस्पताल की लापरवाही के किस्से लगातार हमारे सामने आते है। कभी डॉक्टर की अनुपस्थिति, तो कभी कुछ और वजह से मरीजों को भुगतना पड़ता हैं।
गुरुग्राम के सरकारी अस्पताल में कुछ दिनों पहले डॉक्टरों की लापरवाही के चलते गर्भवती महिला को सड़क पर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा।

इलाज के लिए आई महिला के पास आधार कार्ड नहीं था। जिस वजह से महिला को भर्ती नहीं किया गया। मामले पर कार्यवाही करते हुए राज्य सरकार ने फैंसला लिया है कि कागजी कार्यवाही से पहले मरीजों को इलाज में प्राथमिकता दी जाए।

सभी सिविल सर्जनों, प्रिंसिपल मेडिकल ऑफिसर और मेडिकल सुपरिंटेंट्स को निर्देश दिए है कि मरीजों के इलाज में देरी नही होनी चाहिए। किसी भी रोगी को इलाज के लिए इंकार नहीं किया जाना चाहिए। बहुत से ऐसे इलाज है जो आधार कार्ड या किसी अन्य पहचान पत्र के बिना भी हो सकते है।

गंभीर रोगी का तुरंत अस्पताल में तत्काल उपचार करना चाहिए और बाद में रिकॉर्ड के लिए फाइल का काम करना चाहिए। डीजी, स्वास्थ्य सेवा, डॉ ने कहा कि उन लोगों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी जो आदेशों का पालन नहीं करते हैं। वहीं सतीश कुमार अग्रवाल ने आज कहा कि अस्पतालों में किसी तरह के इलाज के लिए रोगियों के लिए आधार कार्ड अनिवार्य नहीं है।

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