हाईकोर्ट का सरकार को आदेश, विधवा को अनुकम्पा के आधार पर दें सरकारी नौकरी

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Yuva Haryana

Chandigarh (9 April 2018)

हाई कोर्ट ने विधवा को 6 हफ्तें में अनुकम्पा के आधार पर तय प्रावधान के तहत सरकारी नौकरी देने के आदेश दिए हैं। एक विधवा महिला ने पति की मौत के बाद हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिसपर हाईकोर्ट ने ये फैसला सुनाया है। नीलम रानी ने एडवोकेट विकास चतरथ के जरिये हाई कोर्ट में याचिका दायर कर बताया था कि उसका पति एक सीनियर सेकेंडरी स्कूल में वोकेशनल मास्टर था। मई 2011 को उसके पति कि एक साल के लिए कॉन्ट्रेक्ट के आधार पर नियुक्ति हुई थी। एक साल की अवधि समाप्त होने के बाद उसे एक्सटेंशन दे दी गई थी। इसके बाद उसे लगातार एक वर्ष की एक्सटेंशन मिलती रही, लेकिन उनका सेवाकाल तीन साल 6 महीने होने से पहले ही उनकी मौत हो गई। उसके साथ के नियुक्त अन्य वोकेशनल मास्टरों को तीन साल छह महीने के कार्यकाल के बाद रेगुलर कर दिया गया था।

पति की मृत्यु के बाद उसकी विधवा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अनुकम्पा के आधार पर SS मास्टर नियुक्त किये जाने की मांग की थी। जिसे सरकार ने यह कहकर ख़ारिज कर दिया कि ये पद ग्रुप-बी का है, ऐसे में इस पद पर उसे नियुक्ति नहीं दी जा सकती।

जिसके बाद याचिकाकर्ता ने अनुकम्पा के आधार पर क्लर्क पद की मांग की थी। इसे भी सरकार ने ये कहते हुए ख़ारिज कर दिया था कि उसका पति कॉन्ट्रेक्ट पर कार्यरत था। लिहाजा उसे अनुकम्पा के आधार पर नियुक्ति नहीं मिल सकती।

इसी के खिलाफ याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि उसके पति का तीन साल छह महीने का कार्यकाल खत्म होने से पहले ही मृत्यु हो गयी थी। उसके साथ के अन्य सभी को इस कार्यकाल के बाद नियमित कर दिया गया है। अगर उसका पति जीवित होता तो उसे भी नियमित किया जाता। लिहाजा उसे नौकरी दी जानी चाहिए।

जस्टिस जतिंदर चौहान ने याचिका पर कहा कि उसके पति के काम पर किसी भी तरह का कोई सवाल नहीं उठाया गया था। ऐसे में ये तय था कि अगर वो अपना कार्यकाल पूरा करता तो वो नियमित भी हो जाता। हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के साल 2016 के एक फैसले का हवाल देते हुए कहा कि इसी आधार पर विधवा को छह सप्ताह में तय प्रावधान के तहत नौकरी दिए जाने के आदेश दे दिए हैं ।

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