सरकार ने बंद की दलित खिलाड़ियों की छात्रवृति, खेल मंत्री को खबर तक नहीं

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Gourav Sagwal, Yuva Haryana

Chandigarh

सरकार द्वारा पिछले 5 साल से चल रही दलित खिलाड़ियों की छात्रवृति की एक योजना को राज्य सरकार ने बंद कर दिया है। लेकिन खेल मंत्री अनिल विज को इसकी जानकारी भी नहीं है। लेकिन सरकार ने 5 साल से जारी अनुसूचित जाति (sc) के खिलाड़ियों को मिलने वाली मासिक छात्रवृत्ति पर रोक लगा दी है।

खेल विभाग ने पिछले साल 22 दिसंबर को छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करने वाले 2675 विद्यार्थियों में से 2426 को छात्रवृत्ति देने की मंजूरी दी थी। इन विद्यार्थियों के लिए 7 करोड़ 67 लाख 32 हजार रुपए जारी करने के आदेश भी दे दिए गए लेकिन 2 माह बाद इस पर रोक लगा दी।

वहीं हुड्डा सरकार ने 2 जून, 2013 को छात्रवृत्ति योजना शुरू करने का फैसला लिया था। अब खेल विभाग ने सामान्य जातियों के विद्यार्थियों को मिल रही छात्रवृत्ति से तुलना करने के बहाने इस पर रोक लगाई है।

बता दें कि इस योजना के तहत स्कूल-कालेजों में पढ़ने वाले दलित छात्रों को राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक विजेता को 5000, रजत पदक विजेता को 4000 और कांस्य पदक विजेता दलित विद्यार्थियों को 3000 रुपये, अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खेलों में स्वर्ण पदक विजेता के लिए 7000, रजत पदक विजेता के लिए 6000 और कांस्य पदक विजेता के लिए 5000 रुपये, राज्य स्तर के खेलों के स्वर्ण पदक विजेता को 3500, रजत पदक विजेता को 3000 और कांस्य पदक विजेता को 2500 रुपये महीना छात्रवृत्ति दी जाती थी। जबकि खेलों की प्रतिक्रिया में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को 1500 रुपए महीने के दिए जाते थे।

वहीं खेल मंत्री अनिल विज ने कहा है कि मुझे अनुसूचित जाति के खिलाडि़यों की छात्रवृत्ति योजना पर रोक लगाई गई है। विभाग से रिपोर्ट तलब की गई है। वहीं सरकार की ऐसी कोई स्कीम नहीं है।

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