रिपोर्टिंग के दौरान जाहिर ना हो यौन पीड़ित बच्चों की पहचान, मीडिया संस्थानों को सरकार की चेतावनी

Breaking चर्चा में बड़ी ख़बरें सरकार-प्रशासन हरियाणा हरियाणा विशेष
हरियाणा राज्य बाल संरक्षण सोसाइटी ने बलात्कार पीडि़त या यौन उत्पीडि़त बच्चे की पहचान का खुलासा करने के खिलाफ मीडिया संगठनों को चेतावनी दी है।
महिला एवं बाल विकास विभाग ने कहा है कि बच्चों की निजता, गरिमा, शारीरिक और भावनात्मक विकास अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसे बच्चों पर और बच्चों के लिए रिपोर्टिंग, प्रसारण, समाचार के प्रकाशन, कार्यक्रम और वृत्तचित्रों के दौरान हर समय सुरक्षित और संरक्षित किया जाना चाहिए।
किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के चैप्टर-9 की धारा 74 के तहत, किसी भी समाचार पत्र, पत्रिका, न्यूज-शीट या ऑडियो-विजुअल मीडिया या किसी भी पूछताछ या जांच या न्यायिक प्रक्रिया के संबंध में संचार के अन्य रूपों में किसी भी रिपोर्ट में  नाम, पता या स्कूल या कोई ऐसी अन्य विशेष जानकारी नहीं दी जानी चाहिए जिससे कानूनी प्रक्रिया में फसे बच्चे या देखभाल या सुरक्षा की आवश्यकता वाले बच्चे या पीडि़त बच्चे या अपराध के गवाह की पहचान हो सकती है जो उस समय के किसी कानून के तहत इस तरह के मामले में शामिल है। इसके अतिरिक्त, न ही किसी ऐसे बच्चे की तस्वीर प्रकाशित की जानी चाहिए।
पुलिस, उन मामलों में जहां मामला बंद या निपटाया जा चुका है, चरित्र प्रमाण पत्र या किसी और कारण सेे बच्चे के किसी भी रिकॉर्ड का खुलासा नहीं करेगी। बच्चों की पहचान के प्रकटीकरण के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति को छ: महीने तक के कारावास या दो लाख रुपये तक के जुर्माने अथवा दोनों की सजा हो सकती है।
पोस्को अधिनियम, 2012 के तहत, विशेष अदालतों के माध्यम से रिपोर्टिंग, साक्ष्य की रिकॉर्डिंग, जांच और अपराधों के त्वरित परीक्षण के लिए बाल-अनुकूल प्रावधान पर प्रकाश डाला गया है। इस अधिनियम का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया के हर चरण में बच्चे के सर्वोत्तम हितों की रक्षा करना है। बच्चे की निजता और पहचान सभी चरणों में संरक्षित की जानी चाहिए। विशेष रूप से मीडिया में किसी पीडि़त बच्चे या गवाह के बारे में जानकारी जारी करने से बच्चे की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है, जिससे उन्हें गहन अपमान और निराशा होती है। इसके अलावा, अपमान पीडि़त या गवाह को दूसरों के साथ घटना साझा करने से रोक सकता है। विशेष रूप से यौन उत्पीडऩ के मामलों में पीडि़त बच्चे या गवाह के बारे में जानकारी जारी करने से परिवार, सहकर्मियों और समुदाय के साथ उनके संबंधों में तनाव आ सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *