अनाज मंडियों में भ्रष्टाचार का बोल बाला

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Yuva Haryana

Karnal. 11-04-2018

जिले की अनाज मंडियों में फैला भ्रष्टाचार का खेल रुकने का नाम नहीं ले रहा। हालात यह है कि यूपी के ट्रेडर्जों की जिला मंडियों में गेंहू की बिक्री पर लगी पाबंदी के बावजूद भी यह काम धड़ल्ले से चल रहा है। न तो मंडी प्रशासन इस पर कोई लगाम लगा पा रहा है। अब गेहूं के सीजन में भी शुरू हो गया है।

यूपी के व्यापारी ट्रक और ट्रॉलों में बोरियों में भरकर गेहूं को यहां पर ला रहे हैं और सीधे दुकानों पर पहुंचा रहे हैं। आढ़तियों, मार्केट कमेटी अधिकारियों की मिलीभगत के चलते रात के समय जमकर यूपी का गेहूं लिया जा रहा है।  यूपी के व्यापारी ट्रक और ट्रॉलों में बोरियों में भरकर गेहूं को यहां पर ला रहे हैं और सीधे दुकानों पर पहुंचा रहे हैं।

न ही किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई हो रही है। करनाल, घरौंडा, निसिंग, कुंजपुरा, तरावड़ी और घीड़ में खुलकर यूपी के ट्रेडर्स का गेहूं खरीदा जा रहा है। इन पर कार्रवाई तो दूर की बात है, यूपी के गेहूं के आगे मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारी नतमस्तक नजर आ रहे हैं। 1 अप्रैल से शुरू हुए सीजन में आज तक किसी भी आढ़ती के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।

करनाल अनाज मंडी  में एक ताजा मामला सामने आया है। मंडी के सचिव ने यूपी से आ रहे एक गेहूं की गाड़ी को पकड़ा और  इसके लिए पुलिस तक बुलाई गई। जांच की तो पता चला कि यूपी से पुराना गेहूं मंडी के अंदर बेचने के लिए लाया गया था। कुछ ही देर में ऑक्शन रिकॉर्डर जितेंद्र सिंह और मंडी सचिव ने मामले को रफा दफा कर दिया।

केवल मार्केट फीस वसूलने की बात कही गई, जबकि ये अपने आप में गंभीर मामला है। एक साल पुराने गेहूं के जल्द खराब होने की आशंका रहती है। इसी प्रकार, घरौंडा की मंडी में वहां के चेयरमैन ने ही यूपी के गेहूं की गाड़ी पकड़ी थी। तरावड़ी की मंडी में भी यूपी का गेहूं पकड़ा गया था।

आज तक इस पर कारवाई कुछ नहीं की गई। सवाल ये है कि आखिरकार यूपी के गेहूं के आगे हरियाणा के अधिकारी फेल क्यों हैं। ऐसे व्यापारियों के खिलाफ केस क्यों दर्ज कराया जाता। सरेआम सरकार और हरियाणा के किसानों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।

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