भिवानी में किन्नरों द्वारा भरा गया अनूठा भात, धर्म बहन के बेटों की शादी में अदा की भात की रस्म

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Yuva Haryana

Bhiwani, 12 Dec, 2018

अभी तक आपने किन्नरों को शादी समारोह या अन्य किसी खुशी के मौके पर नाचते गाते और मांगते हुए देखा होगा, लेकिन भिवानी में किन्नरों ने इस परंपरा को बदल डाला है। बुलबुल किन्नर ने अपनी पूरी टीम के साथ नरसी की तर्ज पर अपनी धर्म बहन के बेटों की शादी में भात की रस्म अदाा की है।

इससे भी खास बात ये रही कि किन्नरों ने अपनी धर्म बहन की शादी में उसके सगे भाईयों से भी बढ़कर भात भरा और शगुन में चंद पैसे की जगह सभी रिश्तेदारों की चांदी के सिक्कों से मान की गई।

दरअसल, महंत बुलबुल किन्नर ने राजीव कॉलोनी निवासी निर्मला को अपनी धर्म बहन बना रखा था। तो जाहिर है धर्म भाई नाते उसे शादी मे आना था, मगर शादी में बुलबुल किन्नर अकेले नहीं आई, बल्कि दूसरे किन्नरों को लेकर आई।

साथ में बेशकीमती सामान व भात की रस्म अदायगी के लिए कपड़े व दूसरी वस्तुएं थी। परंपराओं के मुताबिक भाई बनकर महंत बुलबुल किन्नर ने बहन को चुंदड़ी ओढ़ाई व भात की रस्म अदा की। निर्मला के परिवार के लोगों व हर रिश्तेदार को चांदी के सिक्के देकर रस्म अदायगी की।

ऐसा नहीं है कि निर्मला के सगे भाई नहीं हैं बल्कि उसके भाई भी हें तो भी उसके बेटों की शादी में भात की रसम अदायगी महंत बुलबुल किन्नर ने की। महंत बुलबुल किन्नर का कहना था कि आमतौर पर समझा जाता है कि किन्नर समाज की मुख्यधारा से अलग हें व उन्हें रिश्ते नातों का इल्म नहीं हैं मगर उन्हें रिश्ते नाते निभाने आते हैं और वे भी अच्छे से सब रस्में जानती हैं।

उनका कहना था कि रिश्ते बनाकर चलना चाहिए। सगों को तो दुनिया मानती है मगर उन्होंने धर्म की बहन के लिए रस्में अदा की हैं। आज के  समय में अपने भी पराए हो जाते हैं मगर उन्हें रिश्ते नातों की फिक्र है। उनका कहना था कि लोग गाय व बेटी की कद्र करना भूल गए हैं जेा कि चिंता की बात है मगर किन्नर इस बात को बखूबी समझते हैं। इसी कारण उन्होंने धर्म की बहन के भात की रसम अदा की है।

वहीं किन्नरो से भाई की भात की रस्में अदा करवाने वाली निर्मला का कहना था कि आज वे बेहद खुश हैं। इस अनूठे भात ने उनकी शादी की खुशियों को और बढ़ा दिया है। निर्मला ने बताया की बुलबुल ने उसके सेज भाइयों से भी बढ़कर भात भरा है।

भले ही समाज में किन्नरों के प्रति गलत धारणाएं बन गई हों, मगर भिवानी मे इस अनूठे भात ने नरसी के भात की याद दिला दी। सगे भाइयों के होते हुए किन्नरो के द्वारा भरे गए इस भात की रस्मों की अदायगी के दौरान सब चहक रहे थे और ढोल की थाप पर नाच भी रहे थे।

वो किन्नर जो कि दूसरों की खुशियों में शरीक होकर नाच गाकर रूपये लेते हैं, उन्हीं किन्नरों में शुमार किन्नरों ने भाई भाभी के रूप में भात भरकर अनूठी मिसाल कायम की। साथ ही संदेश भी दिया कि रिश्ते लिंग अथवा धर्म को नहीं देखते बल्कि रिश्ते बनाकर चलना व निभाना ही सच्चा धर्म है।

 

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